भगवान नृसिंह के मंत्र, नृसिंह मंत्र जप, नृसिंह जयंती मंत्र, God Nrisinh mantra, Nrisinh mantra chanting, Nrisinh Jubilee spells

नृसिंह जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस जयंती का हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्त्व है। भगवान श्रीनृसिंह शक्ति तथा पराक्रम के प्रमुख देवता हैं। पौराणिक धार्मिक मान्यताओं एवं धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु ने ‘नृसिंह अवतार’ लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। भगवान विष्णु ने अधर्म के नाश के लिए कई अवतार लिए तथा धर्म की स्थापना की।

भगवान विष्णु ने हिरण्यकशिपु से भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नृसिंह अवतार लिया था। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि बुरी आत्मा एवं शत्रुओं रक्षा के लिए यदि नृसिंह जयंती के दिन शाम को नृसिंह भगवान के मंत्र का जाप किया जाए तो इसमें सफलता अवश्य मिलती है।

मंत्रोच्चारण के समय शुदिृध का ध्यान रखना आवश्यक है।

1. भगवान नृसिंह का बीज मंत्र : – इसके लिए लाल रंग के आसन पर दक्षिणाभिमुख बैठकर रक्त चंदन या मूंगे की माला से नित्य एक हजार बार जप करने से लाभ मिलता है। भगवान नृसिंह का बीज मंत्र – ‘श्रौं’/ क्ष्रौं (नृसिंहबीज)।

इस बीज में क्ष् = नृसिंह, र् = ब्रह्म, औ = दिव्यतेजस्वी, एवं बिंदु = दुखहरण है। इस बीज मंत्र का अर्थ है ‘दिव्यतेजस्वी ब्रह्मस्वरूप श्री नृसिंह मेरे दुख दूर करें’।

2. संकटमोचन नृसिंह मंत्र :- ध्याये न्नृसिंहं तरुणार्कनेत्रं सिताम्बुजातं ज्वलिताग्रिवक्त्रम्।
अनादिमध्यान्तमजं पुराणं परात्परेशं जगतां निधानम्।।

अगर आप कई संकटों से घिरे हुए हैं या संकटों का सामना कर रहे हैं, तो भगवान विष्णु या श्री नृसिंह प्रतिमा की पूजा करके उपरोक्त संकटमोचन नृसिंह मंत्र का स्मरण करें।

समस्त संकटों से आसानी से छुटकारा मिल जाएगा।
अन्य नृसिंह मंत्र.
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥

ॐ नृम नृम नृम नर सिंहाय नमः ।

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