नये साल का पहला चंद्र ग्रहण 2020 (Chandra Grahan on 10 January 2020)

आज अपने इस लेख की मदद से हम आपको चंद्र ग्रहण 2020 से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देंगे। 2020 का पहला उपच्छाया चंद्रग्रहण (Chandra Grahan on 10-11 January 2020)

वर्ष 2020 में पहला चंद्र ग्रहण साल के पहले माह यानि 10-11 जनवरी को लगेगा| यह चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार करीब 10 बजकर 37 मिनट पर लगेगा और 11 जनवरी को रात्रि 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. इस ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे 06 मिनट है| वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण यूरोप, अफ्रीका, एशिया और आस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में देखा जा सकता है| यह चंद्र ग्रहण मिथुन राशि में पुनर्वसु नक्षत्र के दौरान घटित होगा| इसलिए मिथुन राशि के जातकों पर इस ग्रहण का विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा|

नोट: ऊपर दी गई समय की जानकारी भारतीय मानक समय के अनुसार है।

आइए अब जानते हैं कि चंद्र ग्रहण 2020 की यह घटनाएं किन नक्षत्रों में और कौन सी तिथियों को होंगी इनसे किन राशियों में पर प्रभाव पड़ेगा।

  • पहला चंद्र ग्रहण: चंद्र ग्रहण 2020 का पहला उपच्छाया (पेनुमब्रल) चंद्र ग्रहण 11-12 जनवरी को पड़ेगा। यह चंद्र ग्रहण 22:39 से 02:40 तक दिखाई देगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह चंद्र ग्रहण मिथुन राशि में प्रथमा तिथि को कृष्ण पक्ष और पुनर्वसु नक्षत्र के दौरान घटित होगा। इसलिये मिथुन राशि के जातकों पर इस ग्रहण के कारण कुछ परिवर्तन अपने जीवन में देखने को मिल सकते हैं।

  • दूसरा चंद्र ग्रहण: चंद्र ग्रहण 2020 का दूसरा उपच्छाया चंद्र ग्रहण 6 और 7 जून, शनिवार और रविवार को घटित होगा। यह ग्रहण 23:16 से 02:32 तक दिखाई देगा। हिंदू पंचांग के अनुसार दूसरा ग्रहण वृश्चिक राशि में ज्येष्ठा नक्षत्र के दौरान कृष्ण पक्ष की प्रथमा तिथि को होगा। इस ग्रहण की वजह से वृश्चिक राशि के जातकों के जीवन में कुछ बदलाव आ सकते हैं।

  • तीसरा चंद्र ग्रहण: चंद्र ग्रहण 2020 का तीसरा चंद्र ग्रहण 5 जुलाई, रविवार को होगा। यह ग्रहण 08:38 से 11:21 तक दृश्य होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह ग्रहण धनु राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के दौरान, शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होगा। इसलिये धनु राशि के जातकों के जीवन में इस अवधि में कुछ बदलाव आ सकते हैं।

  • चौथा चंद्र ग्रहण: चंद्र ग्रहण 2020 का चौथा और अंतिम चंद्र ग्रहण 30 नवंबर 2020 सोमवार को होगा। यह चंद्र ग्रहण 13:04 से 17:22 तक दिखाई देगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह चंद्र ग्रहण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में होगा। इसलिये वृषभ राशि के जातकों को इस समय कुछ परेशानियों से गुजरना पड़ सकता है।

 

वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण-

सिर्फ धार्मिक रूप से ही नहीं, वैज्ञानिक रूप से भी ग्रहण को बुरा माना जाता है। वैज्ञानिकों की मानें तो ग्रहण के समय वातावरण में ऐसी तरंगें पैदा होती हैं जो स्वास्थ्य पर बुरा असर करती हैं।

चंद्र ग्रहण का हिंदू शास्त्रों और ज्योतिष में काफी महत्वपूर्ण स्थान है. नये साल यानी वर्ष 2020 में चार चंद्र ग्रहण पड़ने वाले हैं. ये चारों चंद्र ग्रहण अलग-अलग समय पर और अलग-अलग महीने में लगेंगे. वैदिक ज्योतिष के मुताबिक ग्रहण लगना अशुभ माना जाता है. खगोल विज्ञान के अनुसार चंद्र ग्रहण लगने का कारण ये है कि जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के मध्य में आ जाती है तो सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंचता है. इसी खगोलीय घटना को चंद्र ग्रहण कहते हैं. 

 नये साल का पहला चंद्र ग्रहण 2020 (Chandra Grahan on 10 January 2020)

 

नये साल यानि वर्ष 2020 में पहला चंद्र ग्रहण साल के पहले माह यानि 10 जनवरी को लगेगा. यह चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार करीब 10 बजकर 37 मिनट पर लगेगा और 11 जनवरी को रात्रि 2 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. इस ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे 06 मिनट है. वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा. भारत के अलावा यह चंद्र ग्रहण यूरोप, अफ्रीका, एशिया और आस्ट्रेलिया में देखा जा सकेगा.

यह चंद्रग्रहण करीब 4 घंटे तक रहने वाला है। यह चंद्रग्रहण भारत में देखा जा सकता है और इसलिए इसका असर पूजा-पाठ पर भी होगा।

चंद्र ग्रहण 2020 का सूतक काल (Chandra Grahan 2020 Sutak Time)

ग्रहण में लगने वाला सूतक काल एक अशुभ समयावधि होती है. यह सूतक काल चंद्र ग्रहण लगने से तीन पहल पहले ही शुरू हो जाता है जो ग्रहण समाप्ति के साथ ही खत्म होता है.हिंदू मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण में 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिये जाते हैं और मूर्ति स्पर्श की मनाही होती है। सिर्फ धार्मिक रूप से ही नहीं, वैज्ञानिक रूप से भी ग्रहण को बुरा माना जाता है। वैज्ञानिकों की मानें तो ग्रहण के समय वातावरण में ऐसी तरंगें पैदा होती हैं जो स्वास्थ्य पर बुरा असर करती हैं। सेहत के साथ ये तरंगें व्यक्ति के व्यवहार में भी बदलाव लाती हैं। गुस्सा और चिड़चिड़ापन देखने को मिलता है। इसका सबसे बुरा प्रभाव पति-पत्नी के रिश्ते पर पड़ता है। ग्रहण में लोगों को सावधान रहना चाहिए और कुछ नियमों का पालन करना चाहिए।

चंद्र ग्रहण के समय क्या करें और क्या ना, रखें इन बातों का ध्यान

क्या ना करें-

  • घर से बाहर ना निकलें-चंद्रग्रहण के समय वातावरण हमारे अनुकूल नहीं होता है। धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों की राय में किसी भी अनहोनी के होने की संभावना ज्यादा होती है। ऐसे में किसी को भी घर से बाहर अकेले नहीं निकलना चाहिए।

  • शारीरिक संबंध ना बनाएं- शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के समय पति-पत्नी को शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। मगर वैज्ञानिक रूप से भी इस बात को तवज्जो दी जाती है। वैज्ञानिकों की राय में ग्रहण के दौरान संबंध बनाना सेहत और रिश्ते दोनों पर बुरा प्रभाव लाता है। व्यवहार में आ रहे बदलाव प्यार के की बजाय गुस्से को जन्म देते हैं, जो कि सही नहीं है।

  • बाहर खाने से बचें- चंद्रग्रहण के दौरान वैज्ञानिक दृष्टि से भी कुछ खाना-पीना नहीं चाहिए। वातावरण की हानिकारक तरंगें खाने को दूषित कर देती हैं। ऐसे में अगर लोग घर से बाहर निकलकर कुछ खाने समय-पीने का सोच रहे हैं तो इसे कुछ समय के लिए टाल दें। यहां तक कि घर पर भी इस दौरान खाने से बचना चाहिए।

  • वाद-विवाद से बचें- चंद्रग्रहण के समय लोगों को अपने स्वभाव पर नियंत्रण रखने की जरूरत होती है। जब भी लगे कि किसी के साथ बात विवाद में बदल सकती है तो कुछ समय के लिए एक दूसरे से दूरी बना लें। ग्रहण के दौरान आपका बढ़ता हुआ गुस्सा और चिड़चिड़ापन मुद्दे को बढ़ा देगा और फिर परिस्थिति पर काबू पाना मुश्किल हो जाएगा।

  • चंद्रग्रहण में 3 पहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बुजुर्ग, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं। जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। ग्रहण वेद के प्रारंभ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग नहीं करना चाहिए। ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए। ग्रहण के समय तुलसी और शमी के पेड़ को नहीं छूना चाहिए।

  • ग्रहण के दौरान कोई भी नया काम शुरु न करें।

  • ग्रहण के दौरान दांतून करने, बालों पर कंघी लगाने और मलमूत्र का त्याग करने से भी बचना चाहिए।

  • ग्रहण के दौरान किसी भी तरह का फल, फूल या लकड़ी को नहीं तोड़ना चाहिए।

  • व्यसन से दूरी बनाकर रखें बुरे काम, बुरे विचार और झूठ से दूर रहे । क्योंकि इस समय किये गए बुरे कार्य का प्रभाव कई गुना  बढ़ जाता है ।
  • जब ग्रहण शुरू हो तब थोड़ा-सा अनाज और कोई पुराना पहना हुआ कपड़ा निकालकर अलग रख दें और जब ग्रहण समाप्त हो जाये तब उस कपड़े और अनाज को आदरसहित, रिक्वेस्ट के साथ किसी सफाई-कर्मचारी को दान कर दें। इससे आपको शुभ फल प्राप्त होंगे।

 

चंद्र ग्रहण के समय क्या करें-

1)चंद्रग्रहण के समय तीन सूखे नारियल और सवा किलो सतनाजा प्रातरू दान में दें या जल प्रवाह करने से भी ग्रहण का प्रभाव कम होता है। जिनकी कुंडली में चंद्रग्रहण का दोष हो तो उनको अपने जीवनकाल में पड़ने वाले हर पूर्ण सूर्य ग्रहण एवं चंद्रग्रहण के समय सूर्य अथवा चंद्रमा का दान करना चाहिए। इसमें काले तिल, सफेद तिल, काली उड़द एवं गेहूं शामिल है। किसी एक ग्रहण पर तुला दान अवश्य करें।

2)गर्भावस्था की स्थिति में ग्रहण के समय अपने कमरे में बैठ कर के भगवान का भजन ध्यान मंत्र या जप करें। ग्रहण के बाद घर की अच्छी तरह सफाई करें और पूरे घर में धूप या अगरबत्ती का धुआं दिखाएं। चंद्रग्रहण के बाद पितरों को याद करें व उनके नाम पर दान दें। ऐसा करने से ग्रहण का प्रभाव उतर जाएगा। ग्रहण के बाद शिव पूजा भी फायदेमंद मानी गई है। अगर आप ये पूजा किसी मंदिर में जाकर करें तो बेहतर होगा।

3)कई वैज्ञानिक शोधों में यह बात कही जा चुकी है कि ग्रहण के समय मनुष्य की पाचन शक्ति बहुत शिथिल हो जाती है। ऐसे में पेट में दूषित भोजन और पानी जाने पर बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में ग्रहण से पहले ही जिस पात्र में पीने का पानी रखते हों उसमें कुशा और तुलसी के कुछ पत्ते डाल देने चाहिए। कुशा और तुलसी में ग्रहण के समय पर्यावरण में फैल रहे जीवाणुओं को संग्रहित करने की अद्भुत शक्ति होती है।

4) चंद्र देव की आराधना करना चाहिए। चंद्र मंत्र “ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात् का जप करें। चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद घर में शुद्धता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें।

चंद्र ग्रहण की समाप्ति के बाद करें यह काम

  • ग्रहण के समाप्त होने के तुरंत बाद आपको स्नान अवश्य करना चाहिए। इसके साथ ही देवी-देवताओं की मूर्तियों को गंगाजल या शुद्ध जल से नहलाना चाहिए और उनकी पूजा करनी चाहिए।

  • जिन चीजों को आप दान करना चाहते हों तो उन्हें स्पर्श कर रख दें और अगले दिन दान कर दें।
  • घर का शुद्धिकरण करना भी ग्रहण के बाद बहुत जरुरही है। इसके साथ ही पूरे घर में पवित्र गंगा जल का छिड़काव भी करना चाहिए या छिड़काव के लिए गौमूत्र का इस्तेमाल करना चाहिए।

  • सूतक से पहले बने भोजन को सूतक के बाद ग्रहण नहीं करना चाहिए। आपको ताजा भोजन बनाना चाहिए और उसी का सेवन करना चाहिए।

  • ग्रहण समाप्ति के बाद यदि आप जरुरतमंदों को जरुरी चीजें दान करते हैं तो इससे आपको अच्छे फलों की प्राप्ति होती है।

चंद्र ग्रहण 2020: चंद्रग्रहण देखना, सुरक्षित है या नहीं ?

 सूर्य ग्रहण से विपरीत, चंद्र ग्रहण की घटना को नग्न आंखों से देखा जा सकता है। इससे आंखों पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। वैज्ञानिकों के अनुसार साल 2020 में रात्रि के समय चंद्र ग्रहण को आसानी से देखा जा सकता है क्योंकि रात के समय कोई भी हानिकारक किरणें वातावरण में नहीं होंगी। चंद्र ग्रहण को देखने के लिये आंखों पर कोई सुरक्षा जैसे चश्मा पहनने की भी आवश्यकता नहीं होती। हालांकि गर्भवती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि चंद्र ग्रहण के दौरान वो घर से बाहर न निकलें। इससे उनके गर्भ में पल रहे बच्चे पर गलत असर पड़ सकता है। इससे आपके बच्चे का विकास रुक सकता है।

इन बातों को अगर ध्यान में रखा जाए तो चंद्रग्रहण के नकारात्मक असर से बचा जा सकता है।

आशा करते हैं कि चंद्र ग्रहण 2020 पर लिखा गया यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। हमारी वेबसाइट http://indiaastrologyfoundation.in/ से जुड़े रहने के लिए आपका धन्यवाद!

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