यस्यास्ति वित्तं स नरः कुलीनः। स पण्डितः स श्रुतिमान गुणज्ञः।

स एवं वक्ता स च दर्शनीयः। सर्वेगुणाः कांचनमाश्रयन्ति।।

नीति का यह श्लोक आज के धन-प्रधान युग का वास्तविक स्वरूप व सामाजिक चित्र प्रस्तुत करता है। आज के विश्व में धनवान की ही पूजा होती है। जिस मनुष्य के पास धन नहीं होता, वह कितना ही विद्वान हो, कितना ही चतुर हो, उसे महत्ता नहीं मिलती। इस प्रकार ऐसे बहुत से व्यक्ति मिलते हैं, जो सर्वगुण सम्पन्न हैं, परन्तु धन के बिना समाज में उनका कोई सम्मान नहीं है। अतः यह आवश्यक है कि जन्म कुंडली में धन दायक ग्रहों एवं भावों का पूर्ण रूपेण विवेचन किया जाये।

इस लेख के माध्यम से हमारा यह गिल्हरी प्रयास है,आशा है आपके सभी प्रश्नों का समाधान इस विवेचना से होगा।

अधिक जानकारी एवं निजी कुंडली मे उपर्युक्त ग्रह योगो की स्थिति जानने हेतु संपर्क कर सकते है।

महर्षि पराशर के अनुसार जैसे भगवान विष्णु के अवतरण के समय पर उनकी शक्ति लक्ष्मी उनसे मिलती है तो संसार में उपकार की सृष्टि होती है। उसी प्रकार जब केन्द्रों के स्वामी त्रिकोणों के भावधिपतियों से संबंध बनाते हैं तो बलशाली धन योग बनाते हैं।

आपकी कुंडली में भाव और धन तथा सुखमय जीवन जीने का संकेत 

दूसरा भाव सक्रिय होने पर जातक के पास पैसा होता है, लेकिन आय का निश्चित स्रोत नहीं होता
जबकि दूसरे और ग्यारहवें दोनों भावों में मजबूत और सक्रिय होने पर जातक के पास धन भी होता है और उस धन से अधिक धन पैदा करने की ताकत भी। ऐसे जातक को ही सही मायने में अमीर कहेंगे।
कुंडली में दूसरे भाव को ही धन भाव कहा गया है। इसके अधिपति की स्थिति संग्रह किए जाने वाले धन के बारे में संकेत देती है।
कुंडली का चौथा भाव हमारे सुखमय जीवन जीने का संकेत देता है। पांचवां भाव हमारी उत्पादकता बताता है.
छठे भाव से ऋणों और उत्तरदायित्वों को देखा जाएगा।
सातवां भाव व्यापार में साझेदारों को देखने के लिए बताया गया है।
 ग्यारहवां भाव आय और बारहवां भाव व्यय से संबंधित है। 
लग्न भाव के स्वामी के दशम भाव में होने पर जातक अपने पिता से भी अधिक धन अर्जित करता है।
यदि सातवें घर में मंगल या शनि हो अथवा ग्यारहवें घर में राहु के अलावा कोई भी ग्रह उपस्थित हो तो व्यक्ति को व्यापार में अत्यधिक धन लाभ की संभावना होती है।
ग्यारहवें भाव में केतु के विराजमान होने पर जातक को विदेश से आय होती है।
दूसरे भाव के स्वामी के आठवें घर में होने पर जातक अपनी मेहनत और परिश्रम से संपन्न बनता है।
बुध ग्रह के कर्क या मेष राशि में होने पर व्यक्ति का जीवन सुखों से परिपूर्ण रहता है।
यदि सूर्य पंचम भाव में, मंगल चतुर्थ भाव में या बृहस्पति ग्यारहवें भाव में हो तो जातक को पैतृक संपत्ति का लाभ होता है।
किसी भी भाव में बृहस्पति, बुध और शुक्र की युति होने पर जातक धार्मिक कार्यों से धन अर्जित करता है।
सातवें घर में शनि और मंगल की उपस्थिति में व्यक्ति खेल एवं जुंए से पैसा कमाता है।
दशमेश के वृषभ, तुला और शुक्र राशि में प्रवेश करने पर व्यक्तिं को अपनी पत्नी के माध्यम से धन लाभ होता है।
सातवें घर में मंगल, शनि और राहु के होने पर जातक कमीशन के कार्य से धन अर्जित करता है।
षष्टम, अष्टम और बारहवें भाव के स्वामी के छठे, आंठवें, बारहवें और ग्यारहवें घर से संबंधित होने पर जातक को अचानक धन लाभ होता है।
शनि ग्रह के चौथे घर में तुला, मकर या कुंभ राशि के साथ होने पर जातक एक संपन्न गणितज्ञ, अकांउटेंट और सांख्यिकीय बनता है।
पंचमेश के दसवें घर में होने पर व्यक्ति को अपनी संतान से धन लाभ होता है।

धन का कारक ग्रह 

धन का कारक गुरु है, धन प्रदाता स्थान 2, 1, 5, 6, 10, 11। धन योग/ राजयोग के द्वारा धन कैसे प्राप्त होगा और कहां से प्राप्त होगा और किस दिशा में और किसके द्वारा व कितना प्राप्त होगा व किस प्रकार धनयोग अशुभ हो जायेगा व उसका इलाज कैसे होगा। शुभ योग है तो उसे अधिक अशुभता।
कभी-कभी जन्म कुंडली में धन योग होने पर भी उसे धन की प्राप्ति नहीं होती, क्योंकि धन योग को कम करने में (1) प्रेत बाधा, (2) संगत, (3) बुरे कर्म, (4) प्रारब्ध, (5) प्रायश्चित आदि कुछ चीजें तथा शष्टेश, अष्टमेश, द्वादशेष से संबंध द्वितीयेश, चतुर्थेश, पंचमेश, नवमेश, दशमेश, एकादेश, युक्त, दृष्ट, परिवर्तन योग।
लग्न/लग्नेश 2, 4, 5, 6, 10, 11 के स्वामियों से संबंध हो धनेश का 4, 5, 6, 10, 11, चतुर्थेश का 5, 6, 10, 11, पंचमेश का 6, 10, 11 नवमेश का 10, 11 या 3, 6, 11 में राहु हो।
कन्या राशि में राहु के साथ शनि, मंगल, शुक्र, हो तो कुबेर से भी अधिक धन प्राप्त होगा।
गुरु/  चन्द्र त्रिकोण में हो। 10वें और लग्न वृष/शुक्र हो।
सूर्य/ चन्द्र पर स्पष्ट दृष्टि हो तथा दूसरे घर में शुक्र हो और सूर्य/ चन्द्र की दृष्टि हो, 2 गु0 हो। सूर्य/ चन्द्र की राशि हो, दूसरे घर में गुरु हो बुध हो दृष्ट हो।
जन्म दिन का हो और चं0 स्वांश या मित्र नवांश में हो, गुरु की दृष्टि हो। जन्म राम का हो चन्द्र स्वांश मित्र नवांश में हो गुरु पर शुक्र की दृष्टि हो।
निश्चय धन योग:-
लग्न में, स्वगृही सूर्य हो। मंगल  / शुक्र की दृष्टि या युति हो। लग्न में बुध/गुरु की युति या दृष्टि हो, लग्न में मंगल  हो, लग्न में बुध हो, गुरु या शुक्र की युति हो, बुध या मंगल  की दृष्टि हो।
लग्न में शुक्र हो या बुध या लग्न में शनि हो मंगल या गुरु दृष्टि हो।
धन नैतिक/अनैतिक कार्य से:-
नवमेश/दशमेश धन प्रदाय है, जिस ग्रह के साथ हो, उसके अनुसार नैतिक या अनैतिक कर्म से धन प्राप्त हो। अनैतिक चोरी, लॉटरी, मटका, जुआ/लग्न या चन्द्र से उपचय भावों में बुध, गुरु, शुक्र या तीनों ग्रह हो तो अधिक धन एक ग्रह हो तो कम।

धन मिलने का समय

दूसरे घर में चन्द्र या कोई शुभ ग्रह व द्वितीयेश व लग्नेश हो तो उस समय लाभ कारक ग्रह की दशा/अंतरदशा में धन अवश्य मिलता है।

अवस्था

केन्द्र 1, 2, 11 में ग्रह उच्च और मित्र हो तो बाल्यवस्था में धन प्राप्त होगा। धनेश, लाभेश, लग्नेश, केन्द्र व त्रिकोण में हो तो मध्यम अवस्था में धन प्राप्त होगा।
लग्नेश जहां हो उस स्थान का स्वामी लग्नेश में आ जाये तो वृद्धावस्था में धन प्राप्त होगा।
किस दिशा/देश/विदेश :-
चर लग्न हो/लग्नेश चर में हो और शीघ्रगामी ग्रह की दृष्टि हो तो विदेश से धन प्राप्त होगा। स्थिर लग्न/लग्नेश स्थिर राशि में हो और स्थिर ग्रहों की दृष्टि हो तो उसी देश में धन प्राप्त होगा।

किस दिशा में धन प्राप्त होगा 

दशा नाथ की राशि, लाभेश की दिशा, द्वितीयेश की दिशा में जो बलवान हो, उस दिशा में धन प्राप्त होगा।
किस के द्वारा:-
दशम में सूर्य – पिता
दशम में चन्द्र – माता
दशम में मंगल – शत्रु/भाई
दशम में बुध – मित्र
दशम में गुरु – विद्या
दशम में शुक्र – स्त्री से
दशम में शनि – दासों से
धन संख्या:-
उच्च राशि में सूर्य हो तो – एक हजार
उच्च राशि में चन्द्र हो तो – एक लाख
उच्च राशि में मंगल हो तो – एक शत लाख
उच्च राशि में बुध हो तो – करोड़
उच्च राशि में गुरु हो तो – अरब
उच्च राशि में शुक्र हो तो – खरब
उच्च राशि में शनि हो तो – कम/अल्प
द्वितीयेश गोपुरांश हो और शुक्र पारवंतांश हो तो धन प्राप्त होगा।
चतुर्थ भावस्थ छाया ग्रह माता-पिता के यश, धन, संपत्ति, आयु और स्वास्थ्य सुख हेतु शुभ नहीं होते। चतुर्थ की अपेक्षा दशम भावस्थ राहु यश, धन व पद का कारक होता है।

उपजीविका

  1. दशम में जो ग्रह हो, उसकी प्रकृति के अनुसार दो तीन हो तो उनमें बलवान ग्रह/दशमेश जहां स्थित हो, उस ग्रह को प्रकृति के अनुसार होगी।
वराहमिहिर के अनुसार दशमेश जिसके नवांश में स्थित हो, उस नवांश के अनुसार जीविका, उपजीविका का व्यवसाय से संबंध होता हैं।

तत्काल धन

धनेश/दशमेश युक्त हो या संबंध हो।
1, 2, 11 अपने स्वामी से युक्त हो तब।
लग्न में 2, 11 भाव स्वामी हो।
लाभेश पर 2, 4, की दृष्टि हो तथा नवम की भी दृष्टि चं0/मं0 लग्नेश में किसी स्थान में हो तो व्यय भाव में शुक्र/शनि/बुध हो तो धन संग्रह करने की आदत रहती है।

धन आने के ज्योतिषीय उपाय

—-वक्री मंगल के लिये यह जरूरी है कि किसी से भी कोई वस्तु बिना मूल्य चुकाये नही ले,हो सके तो दान मे दी जाने वाली वस्तुओं का परित्याग करे.
—-वक्री मंगल से अधिकतर मामले मे बात झूठ के सहारे से पूरी की जाती है इसलिये झूठ का सहारा नही ले और जो भी है उसे हकीकत मे बयान करने से मंगल सहायक हो जायेगा.
—कभी भी नाखून दांत हड्डी सींग बाल आदि से बने सामान का प्रयोग नही करे,और ना ही घर मे रखें.
—-मूंगा सवा सात रत्ती का गोल्ड मे या तांबे मे पेंडेंट की शक्ल मे बनवा कर गले मे धारण करे.
—भाग्येश को बल देने के लिये चौडे पत्ते वाले पेड घर मे लगायें,दांत साफ़ रखे,किसी प्रकार की झूठी गवाही या —इसी प्रकार के दस्तावेज को प्रस्तुत करने के बाद अपने काम को निकालने की कोशिश नही करे,अन्यथा झूठे मुकद्दमे या इसी प्रकार के आक्षेप बजाय धन देने के पास से भी खर्च करवा सकते है.
—-बायें हाथ की कनिष्ठा उंगली मे सवा पांच रत्ती का पन्ना पहिने.
—–किसी भी पीर फ़कीर का दिया ताबीज या यंत्र घर या पूजा मे नही रखें.

यदि आपने देखा ऐसा सपना तो मिलेगा धन—-

सपनों का काफी गहरा संबंध है हमारे भविष्य से। स्वप्न ज्योतिष के अनुसार सपनों से हमारी भविष्य संबंधी सफलता-असफलता जुड़ी रहती है। यदि हमें निकट भविष्य में धन मिलने के योग हैं, तो इस संबंध में भी सपने यह योग बता देते हैं। धन प्राप्ति के योग बताने वाले कुछ सपने इस प्रकार हैं-

मुर्दा उठाकर ले जाते देखना—-

आकस्मिक धन की प्राप्ति हो सकती है। इस धन से संकट आ सकता है और यह धन स्वयं के उपयोग में नहीं आएगा।

—मछली देखना—-

स्वप्न में मछली दिखाई दे तो धन-दौलत की प्राप्ति होती है। मंत्री पद और उच्च पदवी की प्राप्ति होती है। पाया हुआ धन बरकती होता है तथा जीवनभर चलता है।

—शव यात्रा देखना—

विदेश से लाभ की प्राप्ति हो सकती है। धन-मान, सम्मान मिलने की संभावना होती है। अचानक गढ़ा धन प्राप्ति का योग बनता है।

सामुद्रिकशास्त्र के अनुसार यदि आपका ये अंग फड़के तो जानिए की धन मिलेगा

सामुद्रिकशास्त्र के अनुसार हमारे शरीर के विभिन्न अंगों के फड़कने के कई कारण होते हैं। किसी अंग के फड़कने से शुभ समाचार की प्राप्ति होती है, तो किसी अंग का फड़कना अशुभ माना जाता है।वैसे तो हमारे शरीर के दाहिने अंग के फड़कने को शुभ और बाएं अंग को अशु माना जाता है। लेकिन महिलाओं के लिए यह विपरीत है। महिलाओं के बाएं अंग का फड़कना शुभ माना जाता है।
  • —-यदि आपके दाहिने पैर की पिंडली फड़क रही है तो आपको अचानक कहीं से पैसे मिलने की संभावना बनी रहती है।
  • —निचले होंठ का फड़कना जीवन साथी या प्रेमी या प्रेमिका से सुख और पैसों का सुख मिलने का इशारा होता है। होंठ का दाहिना कोना फड़कना आपको मित्रों से अचानक धन लाभ होने का संकेत देता है।
  • —-दाहिनी आंख का कोना फड़कना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसे में आपको पैसों के साथ-साथ कोई बहुत शुभ समाचार प्राप्त होने की संभावना होती है। बाएं ओर की आंख का फड़कना अशुभ माना जाता है।
  • —–यदि आपको दोनों होंठ एक साथ फड़कते हैं तो आपको पैसा और किस्मत दोनों का योग बनता है। यदि किसी व्यक्ति की दाहिनी हथेली फड़ती है तो उसे धन का लाभ प्राप्त होता है। यदि दाहिना हाथ फड़कता है तो भी पैसे साथ व्यक्ति को मान सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
  • —-यदि किसी व्यक्ति के दोनों भौहों के बीच फड़कन होती है तो ऐसे इंसान को सुख-सुविधाएं प्राप्त होने की संभावनाएं होती है। ऐसा व्यक्ति निकट भविष्य में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति के कंठ या गला फड़फड़ाता है तो यह भी शुभ सगुन है। माथे का फड़कना भी शुभ संकेत देता है। माथा फड़कने से व्यक्ति को भूमि भवन संबंधित लाभ होने की संभावना रहती है।

धन दौलत नहीं मिल रही तो करे लें यह उपाय

सवा पांच किलो आटा और सवा किलो गुड़ के मिश्रित आटे की रोटियां बनाकर गुरुवार के दिन शाम के समय गाय को खिलाएं। नियमित तीन गुरुवार तक यह उपाय करने से धन का अभाव खत्म होगा।
ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः। प्रतिदिन कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है।
मां लक्ष्मी के आगे 11 दिनों तक अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित करें एवं 11वें दिन ग्यारह कन्याओं को भोजन करा कर एक सिक्का व मेहंदी भेंट करें।
अचानक धन लाभ के लिए बरगद की जटा में एक गांठ लगा दें लेकिन धन लाभ के पश्चात् इसे अवश्य ही खोल दें।
काली हल्दी को सिंदूर और धूप देकर लाल कपड़े में लपेटकर एक-दो सिक्कों के साथ तिजोरी में रखें। इस उपाय से धन प्राप्ति संभव है।
धन लाभ हेतु शुक्रवार के दिन गोधूलि वेला में श्री महालक्ष्मी या तुलसी के पौधे के आगे गौ घृत का दीपक जलाने से अवश्य ही लाभ होगा।
सवा पांच किलो आटा और सवा किलो गुड़ के मिश्रित आटे की रोटियां बनाकर गुरुवार के दिन शाम के समय गाय को खिलाएं। नियमित तीन गुरुवार तक यह उपाय करने से धन का अभाव खत्म होगा।
ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः। प्रतिदिन कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का जप करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है।
मां लक्ष्मी के आगे 11 दिनों तक अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित करें एवं 11वें दिन ग्यारह कन्याओं को भोजन करा कर एक सिक्का व मेहंदी भेंट करें।
अचानक धन लाभ के लिए बरगद की जटा में एक गांठ लगा दें लेकिन धन लाभ के पश्चात् इसे अवश्य ही खोल दें।
काली हल्दी को सिंदूर और धूप देकर लाल कपड़े में लपेटकर एक-दो सिक्कों के साथ तिजोरी में रखें। इस उपाय से धन प्राप्ति संभव है।
धन लाभ हेतु शुक्रवार के दिन गोधूलि वेला में श्री महालक्ष्मी या तुलसी के पौधे के आगे गौ घृत का दीपक जलाने से अवश्य ही लाभ होता है।

इस लेख में हमने धन प्राप्ति उपायों के बारे में बताने की कोशिश की है। इन ज्योतिष उपायों की मदद से ईश्वर की कृपा होती है और मनुष्य के कार्यों में आ रही रुकावट दूर होती है और उसे धन और समस्त सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। इन तमाम ज्योतिषीय उपाय के द्वारा व्यक्ति अपने जीवन में चली आ रही बाधाओं को दूर कर, एक सफल व समृद्ध जीवन की कामना कर सकता है। याद रखें किसी भी प्रकार के ज्योतिषीय उपाय और टोटके करने से पूर्व विद्वान ज्योतिषी या पंडित जी से परामर्श अवश्य लें।

जन्म कुंडली के अनुसार धन प्राप्ति के उपाय / लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय

कुंडली मे आय के स्त्रोत आमदनी बढाने के सिद्ध ज्योतिषिय सिद्धांत जानने के लिए कॉल अथवा व्हाट्सएप करे

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धन प्राप्ति के उपाय जानने की इच्छा हर व्यक्ति रखता है। क्योंकि धन का महत्व हर युग और काल खंड में रहा है। बात चाहे पौराणिक काल की रही हो या फिर आधुनिक युग की, धन ने अपना महत्व शुरू से ही सबके जीवन में दर्शाया है। कुल मिलाकर धन के बगैर कुछ भी संभव नहीं है। धन प्राप्ति की कामना हर कोई करता है और उसे पाने के लिए हर संभव प्रयास करता है। इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय, इन उपायों की मदद से आपके जीवन में आ रही आर्थिक तंगी दूर होगी और धन की देवी लक्ष्मी की आप पर कृपा होगी।