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आपकी कुंडली में रिश्तेदारों से कष्ट प्राप्ति का ये योग तो नहीं

SHADYANTRA YOG IN HOROSCOPE CAN GIVE BETRAYAL FROM FAMILY MEMBERS
conspiracy yoga in horoscope

जिस प्रकार दो तत्वों के मेल से योग बनता है, उसी प्रकार दो ग्रहों के मेल से योग का निर्माण होता है। ग्रह योग बनने के लिए कम से कम किन्हीं दो ग्रहों के बीच संयोग, सहयोग अथवा सम्बन्ध बनना आवश्यक होता

ज्योतिष शास्त्र से लोगों के भूतकाल से लेकर भविष्य तक को जाना जा सकता है। भविष्यवाणी करने के समय मुख्य पांचों तत्वों (आकाश, जल, पृथ्वी, अग्नि और वायु) के साथ ही नक्षत्र और राशियों को ध्यान में रखा जाता है। भविष्यवाणी करने के लिए कुंडली में लग्न सबसे प्रभावी होता है। ज्योतिष शास्त्र की पाराशर से लेकर जैमिनि पद्धतियों ने ग्रहों के योगों को ज्योतिष फलादेश का आधार माना है। योग के आंकलन के बिना सही फलादेश कर पाना संभव नहीं है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों के बीच योग बनने के लिए कुछ विशेष स्थितियों का होना जैसे- दो या दो से अधिक ग्रह का दृष्टि सम्बन्ध, भाव विशेष में कोई अन्य ग्रह का संयोग, कारक तत्व की शुभ स्थिति, कारक ग्रह का अकारक ग्रह से सम्बन्ध, एक भाव का दूसरे भाव से सम्बन्ध, नीच ग्रहों से अथवा शुभ ग्रहों से मेल आदि। इन सभी स्थितियों में योग का निर्माण होता है।

जन्मकुंडली में शुभ और अशुभ दोनों तरह के योग होते हैं। यदि शुभ योगों की संख्या अधिक है तो साधारण परिस्थितियों में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी धनी, सुखी और पराक्रमी बनता है, लेकिन यदि अशुभ योग अधिक प्रबल हैं तो व्यक्ति लाख प्रयासों के बाद भी हमेशा संकटग्रस्त ही रहता है। कुंडली में शुभ ग्रहों पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि या शुभ ग्रहों से अधिक प्रबल अशुभ ग्रहों के होने से दुर्योगों का निर्माण होता है।

आपकी कुंडली में भी यह योग है तो आप अपने जीवन में रिश्तेदारों के षड्यंत्र का शिकार होते रहेंगे। इस दोष को शांत करने के लिए यहां प्रस्तुत है कुछ अचूक उपाय।

षड्यंत्र एक पौराणिक शब्द है ! यह तंत्र का विषय है, किन्तु षड्यंत्र का सामान्य अर्थ साज़िश, धोखा देने की योजना, दुरभिसन्धि, गुप्तरूप से की जाने वाली कार्रवाई आदि के रूप में लिया जाता है !

किंतु विश्लेषणात्मक रूप से देखें तो शब्द बना है, षट्+यंत्र = षड्यंत्र अर्थात् वह छह यंत्र या छह विधियाँ जिनसे किसी को नुकसान पहुँचाया जा सकता है या किसी से अपना स्वार्थ सिद्ध किया जा सकता है ! इन छह विधियों के बारे में बताया जाता है कि वह हैं :- 1. जारण 2. मारण 3. उच्चाटन 4. मोहन 5. स्तंभन 6. विध्वंसन ! इसका विस्तृत विवरण अग्नि पुराण में मिलता है !

क्या होता है षड्यंत्र योग : 

यदि कुंडली में लग्नेश(प्रथम भाव का स्वामी) 8वें घर में बैठा हो और उसके साथ कोई शुभ ग्रह न हो तो षड्यंत्र योग का निर्माण होता है। अर्थात लग्नेश अष्टम भाव में विराजमान हो जाए और उस लग्नेश पर लगन पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि हो या किसी शुभ ग्रह ही दृष्टि नहीं हो। लग्नेश और अष्टमेश दोनों की पाप प्रभाव में आ जाए तो बहुत बड़े षड्यंत्र का शिकार होता है।

इस योग का प्रभाव : 

जिस भी जातक की कुंडली में यह योग होता है तो वह वह अपने किसी करीबी के षड्यंत्र का शिकार होता है। जैसे धोखे से धन या किसी भी प्रकार की संपत्ति का छीना जाना, विपरीत लिंगी द्वारा मुसीबत पैदा करना या किसी अन्य तरह के षड्यंत्र का शिकार हो जाना। व्यक्ति को साझेदारी के व्यापार में धोखा, जीवसाथी से धोखा, मित्र से धोखा या अपने किसी करीबी से धोखा मिल सकता है। इसके चलते मान-सम्मान को नुकसान पहुंचता है, आर्थिक और सेहत का भी नुकसान उठाना पड़ता है।

 

इस योग या दोष के 5 सर्वसाधारण उपाय :

1.प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करते रहना चाहिए।

2.प्रत्येक सोमवार भगवान शिव और शिव परिवार की पूजा करनी चाहिए।

3.प्रतिदिन माथे पर केसर या चंदन का तिलक लगाना।

4.कभी कभी शनिवार को छाया दान करें।

5.विश्वास करें लेकिन किसी पर भी अंधे बनकर विश्वास नहीं करना चाहिए।

| प्रथम भाव के स्वामी को प्रथमेश या लग्नेश भी कहते हैं |

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