| प्रथम भाव के स्वामी को प्रथमेश या लग्नेश भी कहते हैं |

अष्टम भाव (मृत्यु भाव) इसे दुष्ट भाव भी कहते हैं | अष्टमेश सभी भावों की हानि करता है | शनि इस भाव का कारक ग्रह है | आयु, जीवन, मृत्यु, प्रेम, बदनामी, पतन, सजा, दुर्घटना, समुद्री यात्रा, वसीयत, दरिद्रता, आलस्य, जीवनसाथी का भाग्य, गुप्त जनेन्द्रिय रोग, दुर्भाग्य, पापकर्म, कर्ज, अकाल मृत्यु, कठिनाइयाँ | बुध, शुक्र शुभ तथा शेष अशुभ |

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