22 may शनि जयंती 2020 पर राशि अनुसार उपाय- पाए शांति और संपन्नता का आशीष

शनि जयंती हिंदू पंचांग के ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाती है। इस दिन शनिदेव की पूजा की जाती है। विशेषकर शनि की साढ़े साती, शनि की ढ़ैय्या आदि शनि दोष से पीड़ित जातकों के लिये इस दिन का महत्व बहुत अधिक माना जाता है। शनि राशिचक्र की दसवीं व ग्यारहवी राशि मकर और कुंभ के अधिपति हैं। एक राशि में शनि लगभग 18 महीने तक रहते हैं। शनि का महादशा का काल भी 19 साल का होता है। प्रचलित धारणाओं के अनुसार शनि को क्रूर एवं पाप ग्रहों में गिना जाता है और अशुभ फल देने वाला माना जाता है लेकिन असल में ऐसा है नहीं। क्योंकि शनि न्याय करने वाले देवता हैं और कर्म के अनुसार फल देने वाले कर्मफलदाता हैं इसलिये वे बूरे कर्म की बूरी सजा देते हैं अच्छे कर्म करने वालों को अच्छे परिणाम देते हैं। 

शनि ग्रह कुंडली के 12 भावों पर अलग-अलग प्रकार से प्रभाव डालता है। इसका प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से मनुष्य के जीवन पर पड़ता है। वैदिक ज्योतिष में शनि को एक क्रूर ग्रह माना गया है लेकिन जिन जातकों की जन्म कुंडली में शानि मजबूत होता है उनको यह अच्छे परिणाम देता है। आइए जानते हैं इस शनि जयंती पर अपनी राशि के अनुसार क्या उपाय करें ताकि आपके जीवन से भी शनिदेव समस्याओं को खत्म कर दें। इन उपायों से आपके जीवन से आर्थिक संकट समाप्त होंगे, जीवन में तरक्की होगी। वैवाहिक, दांपत्य जीवन, प्रेम प्रसंग में लाभ होता है। भूमि, भवन, वाहन संपत्ति सुख प्राप्त होता है।

शनिदेव कर्म और सेवा के कारक हैं यानी इसका सीधा-सीधा असर व्यक्ति की नौकरी और व्यवसाय पर होता है। अत: अब नौकरी और व्यवसाय में आ रहे कष्ट समाप्त होंगे। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों के अनुसार शनि जयंती के क्या हैं सरल उपाय...

  • मेष: इस राशि के जातक शनि जयंती के दिन अपने घर में श्री शिव रुद्राभिषेक करवाएं।

  • इस दिन एक काले कपडे में ४०० ग्राम साबुत उडद, ७ लोहे की कील और ४ कोयले के टूकडे रखकर दान करे.

  • शनि जयंती पर सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न (नीली) सोना, चांदी या तांबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर धारण करें।

  • शनि यंत्र के साथ नीलम या फिरोजा रत्न गले में लॉकेट की आकृति में पहन सकते हैं ।

  • किसी भी विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के मंत्रों के 23000 जाप करें या करवाएं। ये है शनि का मंत्र : ‘ऊं प्रां प्रीं सरू श्नैश्चराय नम:”.

  • शनि जयंती को व्रत रखें। चींटियों को आटा डालें।

  • जूते, काले कपड़े, मोटा अनाज व लोहे के बर्तन दान करें।

  • इस दिन एक काले कपडे में 400 ग्राम साबुत उडद, ७ लोहे की कील और 4 कोयले के टूकडे रखकर दान करे !

  • प्रातः स्नान के बाद सवा किलो बाजरा मिट्टी के बर्तन में भरकर उसके उपर सरसो के तेल का चार बत्ती वाला दीपक जलाएं। इसके बाद शनि के मंत्र ऊं प्रां प्रीं प्रौं सः शनयै नमः मंत्र की पाच माला जाप करें। मंत्र पूर्ण होने के बाद यह पात्र किसी जरूरतमंद को दान करें।

  • वृषभ : इस राशि के जातक इस दिन शनि स्त्रोत का पाठ कर के पीपल के नीचे तेल का दीपक जलायें.महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

  • काले घोड़े की नाल या समुद्री नाव की कील से लोहे की अंगूठी बनवाएं। उसे तिल के तेल में रखें तथा उस पर शनि मंत्र का 23000 जाप करें। शनि जयंती पर इसे धारण करें। यह अंगूठी मध्यमा (शनि की उंगली) में ही पहनें।

  • विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के मंत्रों के 23000 जाप करें या करवाएं। मंत्र- “ऊं ऐं ह्लीं श्रीशनैश्चराय नमरू” शनिदेव का अभिषेक सरसो के तेल से करें व 108 दीपकों से शनिदेव की आरती करें।

  •  जल में कच्चा दूध मिलाकर पीपल की जड़ों में डालें। ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें और पीपल की जड़ की मिट्टी से तिलक करें।

  • मिथुन राशि के जातक शनि जयंती पर महाराज दशरथकृत नील शनि स्तोत्र का पाठ अवश्य करें।

  • इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलायें.

  • शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए 7 प्रकार के अनाज व दालों को मिश्रित करके पक्षियों को चुगाएं।

  • बैंगनी रंग का सुगंधित रूमाल अपने पास रखें।

  • शनिदेव के सामने खड़े रहकर दर्शन न करें, एक ओर खड़े रहकर दर्शन करें, ताकि शनिदेव की दृष्टि सीधे आप पर न पड़े

  • शनि जयंती पर सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न (नीली) सोना, चांदी या तांबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर मध्यमा उंगली में पहनें।

  • मिथुन राशि के जातक शनि अमावस्या के दिन एक मिट्टी के कलश में सवा किलो साबुत मूंग हरे कपड़े में बांधकर रखें। इसके ऊपर सरसो के तेल का दीपक जलाएं। ऊं शं शनैश्चराय नमः की पांच माला जाप करें। यह कलश किसी गणेश या शनि मंदिर में रख आएं।

  • शनि अमावस्या के दिन अपने वजन के बराबर अन्न दान करें।

  • कर्क राशि के जातक शनि जयंती पर तथा प्रत्येक शनिवार को सुबह स्नान आदि करने के बाद बड़ (बरगद) और पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक लगाएं और दूध एवं धूप आदि अर्पित करें।

  • काले धागे में बिच्छू घास की जड़ को अभिमंत्रित करवा कर शनि जयंती या किसी शनिवार को शुभ मुहूर्त में धारण करने से भी शनि संबंधी सभी कार्यों में सफलता मिलती है।

  •  शनि जयंती पर इन 10 नामों से शनिदेव का पूजन करें- इस दिन व्रत करे और शनि के मन्दिर में सरसों के तेल का दीपक जलायें. कोणस्थ पिंगलो बभः कृष्णो रौद्रोन्तको यमः। सौरिः शनैश्चरो मंदः पिप्पलादेन संस्तुतः।। अर्थातः 1- कोणस्थ, 2- पिंगल, 3- बभ्रु, 4- कृष्ण, 5- रौद्रान्तक, 6- यम, 7, सौरि, 8- शनैश्चर, 9- मंद व 10- पिप्पलाद। इन दस नामों से शनिदेव का स्मरण करने से सभी शनि दोष दूर हो जाते हैं।

  •  इस राशि के जातक शनि अमावस्या पर मिट्टी के घड़े में सवा किलो चावल भरकर इसके ऊपर सरसो के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। शनि के मंत्रों का जाप करें और इस पात्र को गरीब को भेंट करें।शनि मंदिर में शनि शांति हवन करवाएं

  • शनि जयंती के दिन एक लोहे के कटोरे में सरसों भरकर अपना चेहरा उसमें देखकर छाया दान करें।

  • सिंह राशि के जातक इस दिन पारद शिवलिंग के सामने महामृ्त्युंजय मंत्र का 108 बार जप करे.

  • काली गाय की सेवा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। उसके शीश पर रोली लगाकर सींगों में कलावा बांधकर धूप-आरती करनी चाहिए। फिर परिक्रमा करके गाय को बूंदी के चार लड्डू खिला दें।

  • शनि जयंती पर तथा हर शनिवार को उपवास रखें। सूर्यास्त के बाद हनुमानजी का पूजन करें। पूजन में सिंदूर, काली तिल्ली का तेल, इस तेल का दीपक एवं नीले रंग के फूल का प्रयोग करें।

  • सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न (नीली) सोना, चांदी या तांबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर धारण करें।

  • शनि जयंती पर जूते, काले कपड़े, मोटा अनाज व लोहे के बर्तन दान करें।

  • सिंह राशि के जातक शनि अमावस्या के दिन शनि मंदिर के बाहर बैठे कुष्ठ रोगियों या गरीबों को सिक्के दान करें। किसी गरीब को सवा किलो गेहूं और लाल वस्त्र दान दें।

  •  गौशाला में सरसो की खली दान करें।

  • शनि जयंती के दिन काले तिलों अथवा साबुत उड़द का दान करें।

  • कन्याकों  राशि के जातक  इस दिन नारियल को जल प्रवाह करें.

  • शनि जयंती व शनिवार को बंदरों व काले कुत्तों को लड्डू खिलाने से भी शनि का कुप्रभाव कम हो जाता है अथवा काले घोड़े की नाल या नाव में लगी कील से बना छल्ला धारण करें।

  •  शनि जयंती के एक दिन पहले काले चने पानी में भिगो दे। शनि जयंती के दिन ये चने, कच्चा कोयला, हल्की लोहे की पत्ती एक काले कपड़े में बांधकर मछलियों के तालाब में डाल दें। यह टोटका पूरा एक साल करें। इस दौरान भूल से भी मछली का सेवन न करें।

  •  किसी भी विद्वान ब्राह्मण से या स्वयं शनि के मंत्रों के 23000 जाप करें या करवाएं। ये है शनि का मंत्र-“ऊं प्रां प्रीं सः श्नैश्चराय नमः” शनि जयंती व प्रत्येक शनिवार को व्रत रखें।

  •  कन्या राशि के जातक शनैश्चरी अमावस्या के दिन काले चने, काली उड़द, काले कपड़े या कंबल का दान करें।

  • शनि देव के निमित्त किन्नर को नीले वस्त्र पर दक्षिणा रखकर दान दें और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

  • शनि अमावस्या पर केला, मीठी खीर, गुड़ व देसी चने मजदूरों को बांटें।

  •  चींटियों को आटा डालें।

  • तुला राशि के जातक शनि जयंती के दिन सुबह किसी नदी में स्नान करने के बाद समीप स्थित किसी शनि मंदिर में जाकर शनि देव की आरती करें। शनि जयंती के साथ आपको नियमित रूप से शमी वृक्ष को जल देकर उसकी पूजा करनी चाहिए।

  • शनि जयंती के एक दिन पहले सवा-सवा किलो काले चने अलग-अलग तीन बर्तनों में भिगो दें। अगले दिन नहाकर, साफ वस्त्र पहनकर शनिदेव का पूजन करें और चनों को सरसों के तेल में छौंक कर इनका भोग शनिदेव को लगाएं और अपनी समस्याओं के निवारण के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद पहला सवा किलो चना भैंसे को खिला दें। दूसरा सवा किलो चना कुष्ट रोगियों में बांट दें और तीसरा सवा किलो चना अपने ऊपर से उतारकर किसी सुनसान स्थान पर रख आएं। इस टोटके को करने से शनिदेव के प्रकोप में कमी आ सकती है।

  • सवा किलो काला कोयला, एक लोहे की कील एक काले कपड़े में बांधकर अपने सिर पर से घुमाकर जल में प्रवाहित कर दें।

  • सवा किलो जौ का दान करें

  •  शनि मंदिर में शनि शांति हवन करवाएं। अपने वजन के बराबर गेहूं मंदिर में दान करें।

  • इस दिन एक काले कपडे में ४०० ग्राम साबुत उडद रखकर किसी भिखारी को दान करें.

  • वृश्चिक राशि के जातक शनि जयंती पर शनि यंत्र की स्थापना व पूजन करें।

  • शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर कुश के आसन पर बैठ जाएं। सामने शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें व उसकी पंचोपचार से विधिवत पूजन करें। इसके बाद रुद्राक्ष की माला से नीचे लिखे किसी एक मंत्र की कम से कम पांच माला जाप करें तथा शनिदेव से सुख-संपत्ति के लिए प्रार्थना करें।

  •  यदि प्रत्येक शनिवार को इस मंत्र का इसी विधि से जाप करेंगे तो शीघ्र लाभ होगा। वैदिक मंत्र- “ऊँ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु नः”

  • इस दिन नारियल अपने सिर से 7 बार उतार कर जल प्रवाह करें.

  • जयंती के अलावा भी हर दिन किसी गरीब अथवा असहाय की यथासंभव सहायता करें।

  •  वृश्चिक: इस राशि के जातक शनैश्चरी अमावस्या के दिन सवा किलो साबूत मसूर या काले तिल शनि मंदिर में दान करें। किसी सफाईकर्मी को भोजन करवाएं या दक्षिणा भेंट करें।

  • धनु राशि के जातक शनि जयंती पर किसी श्री हनुमान मंदिर में जाकर श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनि दोष की शांति के लिए श्री हनुमान जी से प्रार्थना करें।

  • शनि जयंती पर तथा प्रत्येक शनिवार को सुबह स्नान आदि करने के बाद सरसों के तेल का दीपक लगाएं और दूध एवं धूप आदि अर्पित करें।

  • सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न (नीली) सोना, चांदी या तांबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर धारण करें।

  • इस दिन व्रत करे और पारद शिवलिंग के सामने महामृ्त्युंजय मंत्र का 108 बार जप करे

  • शनि जयंती पर चींटियों के स्थान पर चीनी और गेहूं का आटा डालें।

  • धनु राशि के जातक शनि अमावस्या पर सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करके सवा पांच किलो चने की दाल नए पीले कपड़े में बांधकर अपने पूजा स्थान में रखें।

  • शनिदेव का पूजन करें और उनके सामने सरसो के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं।

  •  बूंदी के लड्डू का भोग भी लगाएं।

  • शनि जयंती पर 11 साबूत नारियल बहते हुए जल में प्रवाहित करें और शनिदेव से जीवन को सुखमय बनाने के लिए प्रार्थना करें।

  • मकर राशि: शनि जयंती के दिन शमी वृक्ष की जड़ को विधि-विधान पूर्वक घर लेकर आएं। किसी योग्य विद्वान से अभिमंत्रित करवा कर काले धागे में बांधकर गले या बाजू में धारण करें।

  • काले धागे में बिच्छू घास की जड़ को अभिमंत्रित करवा कर श्रवण नक्षत्र में या शनि जयंती के शुभ मुहूर्त में धारण करने से भी शनि संबंधी सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
  • शनिवार को इन 10 नामों से शनिदेव का पूजन करें- कोणस्थ पिंगलो बभः कृष्णो रौद्रोन्तको यमः। सौरिरू शनैश्चरो मंदरू पिप्पलादेन संस्तुतरू।। अर्थातरू 1- कोणस्थ, 2- पिंगल, 3- बभ्रु, 4- कृष्ण, 5- रौद्रान्तक, 6- यम, 7, सौरि, 8- शनैश्चर, 9- मंद व 10- पिप्पलाद। इन दस नामों से शनिदेव का स्मरण करने से सभी शनि दोष दूर हो जाते हैं।

  • इस दिन तांबे के कलश में जल भरकर पीपल को जल प्रदान कर पीपल के नीचे तेल का दीपक जलायें.

  • शनि जयंती पर महाराज दशरथकृत नील शनि स्तोत्र का पाठ अवश्य करें

  • मकर: इस राशि का स्वामी शनि है। शनैश्चरी अमावस्या पर शनि के निमित्त व्रत रखें। शनि व्रत की कथा पढ़े-सुनें।

  • कुंभ राशि के जातक शनि जयंती के दिन, शनि के नक्षत्रों और शनि की होरा में उत्तम गुणवत्ता का नीलम रत्न धारण करें।

  •  काले घोड़े की नालर्शन न करें, एक ओर खड़े रहकर दर्शन करें, ताकि शनिदेव की दृष्टि सीधे आप पर नहीं पड़े।

  •  श्री हनुमान जी को चोला चढ़ाएं। चोले में सरसों या चमेली के तेल का उपयोग करें और इन तेलों से ही दीपक भी जलाएं।

  •  इस दिन एक काले कपडे में 400 ग्राम साबुत उडद, 7 लोहे की कील और 4 कोयले के टूकडे रखकर दान करे

  • कुंभ राशि के जातक शनि अमावस्या पर भिखारियों को भोजन करवाएं। चप्पल भेंट करें। शनि मंदिर में सवा लीटर सरसो का तेल दान करें।

  •  शनि अमावस्या पर सात सूखे नारियल और 700 ग्राम बादाम किसी मंदिर में दान करें।

  • बंदरों और काले कुत्तों को लड्डू खिलाने से भी शनि का कुप्रभाव कम हो जाता है।

  • मीन राशि के जातक शनि जयंती के दिन चोकर युक्त आटे की दो रोटी लेकर एक पर तेल और दूसरी पर घी चुपड़ दें। घी वाली रोटी पर थोड़ा मिष्ठान रखकर काली गाय को खिला दें तथा दूसरी रोटी काले कुत्ते को खिला दें और शनिदेव का स्मरण करें।

  • एक कांसे की कटोरी में तिल का तेल भर कर उसमें अपना मुख देख कर और काले कपड़े में काली उड़द, सवा किलो अनाज, दो लड्डू, फल, काला कोयला और लोहे की कील रख कर डाकोत (शनि का दान लेने वाला) को दान कर दें।

  •  अपने से छोटों से अच्छा व्यवहार करें और किसी धार्मिक स्थल के मुख्य द्वार पर सफाई करें।

  • मीन राशि के जातक अमावस्या के दिन अपने वजन के बराबर गेहूं या चने की दाल लेकर गरीबों में बांट दें।

  •  गरीबों को भोजन व वस्त्र भेंट करें। पीले फल गाय को खिलाएं।

अमावस्या हर माह आती है, लेकिन शनिवार को आए तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस बार शनैश्चरी अमावस्यसा 22 मई को आ रही है। इस दिन शनिवार होने के कारण यह अमावस्या विशेष फलदायी हो गई है। शनि ग्रह कुंडली के 12 भावों पर अलग-अलग प्रकार से प्रभाव डालता है। इसका प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से मनुष्य के जीवन पर पड़ता है। वैदिक ज्योतिष में शनि को एक क्रूर ग्रह माना गया है लेकिन जिन जातकों की जन्म कुंडली में शानि मजबूत होता है उनको यह अच्छे परिणाम देता है। आइए जानते हैं इस शनैश्चरी अमावस्या पर अपनी राशि के अनुसार क्या उपाय करें ताकि आपके जीवन से भी शनिदेव समस्याओं को खत्म कर दें। इन उपायों से आपके जीवन से आर्थिक संकट समाप्त होंगे, जीवन में तरक्की होगी। वैवाहिक, दांपत्य जीवन, प्रेम प्रसंग में लाभ होता है। भूमि, भवन, वाहन संपत्ति सुख प्राप्त होता है। अमावस्या हर माह आती है, लेकिन शनिवार को आए तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस बार शनैश्चरी अमावस्यसा 22 मई को आ रही है। इस दिन शनिवार होने के कारण यह अमावस्या विशेष फलदायी हो गई है। शनि ग्रह कुंडली के 12 भावों पर अलग-अलग प्रकार से प्रभाव डालता है। इसका प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से मनुष्य के जीवन पर पड़ता है। वैदिक ज्योतिष में शनि को एक क्रूर ग्रह माना गया है लेकिन जिन जातकों की जन्म कुंडली में शानि मजबूत होता है उनको यह अच्छे परिणाम देता है। आइए जानते हैं इस शनैश्चरी अमावस्या पर अपनी राशि के अनुसार क्या उपाय करें ताकि आपके जीवन से भी शनिदेव समस्याओं को खत्म कर दें। इन उपायों से आपके जीवन से आर्थिक संकट समाप्त होंगे, जीवन में तरक्की होगी। वैवाहिक, दांपत्य जीवन, प्रेम प्रसंग में लाभ होता है। भूमि, भवन, वाहन संपत्ति सुख प्राप्त होता है।

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