श्रापित योग सम्बन्धी मान्यताएं (Beliefs about Inauspicious Yogas)

भारतीय दर्शन इस बात को मानता है कि आत्मा अमर है और कर्म के अनुसार जीव को अलग-अलग योनि में जन्म लेना पड़ता है. कर्म के अनुसार ही व्यक्ति को वर्तमान जीवन में सुख-दुख, आनन्द व कष्ट प्राप्त होता है (The person gets results according to Karma). कुण्डली में ग्रहों की मौजूदगी भी इसी अनुसार होती है. कुण्डली में श्रापित योग के होने का कारण भी पूर्व जन्म के कर्मों का फल माना जाता है. कि यह योग अत्यंत अशुभ फलदायी होता है. इस योग का फल व्यक्ति को अपने कर्मों के अनुसार भोगना पड़ता है.

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