" /> जानें कब है Maha shivaratri 2020, भगवान शिव की कृपा पाने के लिए इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, India Astrology Foundation. |

२१ फरवरी की संध्याकाल ०५:३६ बजे से आरंभ होगी महाशिवरात्रि 2020

जानें कब है Maha shivaratri 2020, भगवान शिव की कृपा पाने के लिए इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा

 शुक्रवार, 21 फरवरी 2020 को महाशिवरात्रि है। हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शिव पूजा का महापर्व शिवरात्रि मनाया जाता है। ज्योतिर्विद श्यामा गुरुदेव (आध्यात्मिक मार्गदर्शक एवं ज्योतिषीय चिंतक) घल्गो India Astrology Foundation के अनुसार, जब सूर्य कुंभ राशि और चंद्र मकर राशि में होता है, तब फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात ये पर्व मनाया जाता है। 21 फरवरी की शाम 5.36 बजे तक त्रयोदशी तिथि रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी। शिवरात्रि रात्रि का पर्व है और 21 फरवरी की रात चतुर्दशी तिथि रहेगी, इसलिए इस साल ये पर्व 21 फरवरी को मनाया जाएगा। इस बार शिवरात्रि पर 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है।

इससे पहले ग्रहों की यह स्थिति और ऐसा योग वर्ष 1961 में बने थे। इस दौरान दान-पुण्य करने का भी विधान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह विशेष संयोग लगभग 59 साल बाद बन रहा है, जो साधना-सिद्धि के लिए खास महत्व रखता है। इस साल गुरु भी अपनी स्वराशि धनु राशि में स्थित है। इस योग में शिव पूजा करने पर शनि, गुरु, शुक्र के दोषों से भी मुक्ति मिल सकती है। 21 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। पूजन के लिए और नए कार्यों की शुरुआत करने के लिए ये योग बहुत ही शुभ माना गया है।

मान्यता है कि इस दिन शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। ऐसे में आइए जानते हैं इस दिन भोलेबाबा को प्रसन्न करने के लिए किस शुभ मुहूर्त में पूजा करना फलदायक है। 

महाशिवरात्रि 2020 का शुभ मुहूर्त 21 फरवरी शाम को 5 बजकर 36 मिनट से 22 फरवरी, शनिवार को शाम 07 बजकर 02 मिनट तक रहेगा।

महाशिवरात्रि 2020 पर 28 वर्षो बाद बन रहा है विष योग ।

इस वर्ष शनि ने 23 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश किया है। महाशिवरात्रि  यानी 21 फरवरी 2020 पर शनि के साथ चंद्र भी रहेगे। शनि-चंद्र की इस युति की वजह से विष योग बन रहा है।

इससे पहले करीब 28 साल पहले महाशिवरात्रि पर विष योग 2 मार्च 1992 को बना था। इस योग में शनि और चंद्र के दोष निवारण के लिए विशेष पूजा अनुष्ठान करनी चाहिए।

महाशिवरात्रि पर ये योग बनने से इस दिन शिव पूजा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। कुंडली में शनि और चंद्र के दोष दूर करने के लिए शिव पूजा करने की सलाह दी जाती है।

इस निवारण पूजा के माध्यम से जीवन से जुड़े सभी विवाद और परेशानियां दूर होती हैं।

विष योग की पीड़ा को कम करने के लिए महादेव शिव की आराधना व उपासना शुभ रहती है। ‘ऊँ नमः शिवाय’ मन्त्र का नित्य रोज (सुबह-शाम) कम से कम 108 बार करना चाहिए।

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