आपकी कुंडली और ग्रहों के दोष तथा कुछ सावधानियां !

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धर्म में आस्था रखने वाला व्यक्ति इन सुखों को पाने या कमी न होने के लिए देवकृपा की हमेशा आस रखता है। हर गृहस्थ या अविवाहित जीवन में बुद्धि, ज्ञान, संतान, भवन, वाहन इन पांच सुखों की कामना जरूर करता है।

पूजा-पाठ में तो हम प‍ंडित से सलाह-मश्‍वरा ले लेते हैं, लेकिन कई अन्‍य काम ऐसे होते हैं, जिनमें आप किसी से सलाह नहीं लेते और वो काम करने के बाद तमाम परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। वैसे यह संभव भी नहीं कि बार-बार हर काम पंडित से पूछ कर ही किया जाये, लेकिन जरा सोचिये

यदि आपको खुद अपनी कुंडली का ज्ञान हो, तो क्‍या हो?

आप खुद सावधानियां बरतते हुए ऐसे काम नहीं करेंगे, जो आपके लिये नुकसानदायक हो सकते हैं।

जिन लोगों की कुंडली में जो ग्रह उच्च का हो या स्वराशि का हो, उस ग्रह की वस्तुओं का दान नहीं करना चाहिए।

इसके विपरीत ग्रह नीच या अशुभ स्थान में हो तो इन ग्रहों की वस्तुओं का दान भी नहीं लेना चाहिए।

यह बात शायद आपको नहीं मालूम होगी, लेकिन है बड़े पते की बात। ऐसी तमाम बातों पर आपका इस लेख के माध्यम से ध्‍यान आकर्षित करा रहे हैं इंडिया एस्ट्रोलॉजी फाउंडेशन के ज्योतिर्विद श्यामा गुरुदेव –

1- बुध यदि जन्मकुंडली में छठे भाव में स्थित है तो जातक को अपनी बेटी या बहन का विवाह उत्तर दिशा में नहीं करना चाहिए अन्यथा पिता व पुत्री दोनों परेशान रहते है।

2- जिस जातक की कुंडली में बुध चतुर्थ भाव में हो, उसे घर में तोता नहीं पालना चाहिए वरना माता को कष्ट होगा।

3- मंगल पत्रिका में 12वें भाव में स्थित हो तो जातक को अपने भाईयों से झगड़ा नहीं करना चाहिए।

4- मंगल आठवें भाव में हो तो जातक को घर में तन्दूर नहीं लगवाना चाहिए अन्यथा पत्नी रोगिणी बनी रहेगी।

5- केतु यदि तीसरे भाव में स्थित हो तो जातक को दक्षिण दिशा वाले मकान में नहीं रहना चाहिए अन्यथा आर्थिक व मानसिक स्थिति डांवाडोल रहती है।

6- चन्द्रमा और केतु जन्मपत्री में किसी भाव में एक साथ स्थित हो तो व्यक्ति को किसी के पेशाब पर पेशाब नहीं करना चाहिए।

7- चन्द्रमा 11वें भाव हो तो जातक अपनी बहन या कन्या का कन्यादान प्रभात काल में नहीं करना चाहिए वरना पिता व बेटी दोनों दुःखी रहेंगे।

8- चन्द्रमा यदि 12 वें भाव में स्थित हो तो जातक किसी पुजारी, साधु को प्रतिदिन रोटी न खिलायें, बच्चों के लिए बिना फीस विद्या का प्रबन्ध न करें और विद्यालय न खोलें वरना दुःखों का पहाड़ टूट पड़ेगा और पानी तक नसीब नहीं होगा।

9- चन्द्रमा छठें भाव में हो तो दूध, पानी का दान करें एंव नल व कुआं की मरम्मत करायें वरना परिवार में अकाल मृत्यु का भय बना रहेगा।

10- शनि कुंडली में आठवें भाव में स्थित हो तो जातक को धर्मशाला आदि नहीं बनवाना चाहिए अन्यथा वह आर्थिक रूप से हमेशा तंग रहेगा।

11- यदि कुंडली का दूसरा भाव खाली हो और शनि आठवें भाव में हो या 6, 8,

12 भाव में शत्रु ग्रह स्थित हो तो जातक को मन्दिर, गुरूद्वारा, मस्जिद के अन्दर ना जाकर बाहर से ही प्रणाम करना चाहिए।

12- शुक्र 9वें भाव में स्थित हो तो जातक अनाथ बच्चों को गोद न लें एंव सफेद दही का सेंवन नहीं करना चाहिए।

13- बृहस्पति पांचवें भाव में तथा शनि प्रथम भाव में हो तो जातक कभी भी भिखारी को भिक्षा के पात्र तांबे का सिक्का न दें अन्यथा हानि होती है।

14- बृहस्पति यदि सातवें भाव में हो तो जातक किसी को वस्त्र दान करें, घर में मन्दिर न बनायें और घंटी व शंख बजाकर पूजा न करें। ऐसा करने से धन नष्ट होता है।

15- बृहस्पति दशवें भाव में तथा चन्द्रमा व मंगल चैथे में स्थित हो तो जातक अपने हाथ से पूजा स्थान न बनवायें एंव भिखारी को भिक्षा न दें वरना झूठे आरोप में फॅसकर लम्बी सजा काटनी पड़ सकती है।

16- सूर्य यदि सातवें व आठवें भाव में हो तो जातक को प्रातःकाल सूर्य नमस्कार व दान करना चाहिए।

  1. कभी भी उच्च के ग्रहों का दान नहीं करना चाहिए और नीच ग्रहों की कभी पूजा नहीं करनी चाहिए।

  2. कुंडली में गुरु दशम भाव में हो या चौथे भाव में हो तो मंदिर निर्माण के लिए धन नहीं देना चाहिए यह अशुभ होता है और जातक को कभी भी फांसी तक पहुंचा सकता है।

  3. कुंडली के सप्तम भाव में गुरु हो तो कभी भी पीले वस्त्र दान नहीं करने चाहिए।

  4. बारहवें भाव में चन्द्र हो तो साधुओं का संग करना बहुत अशुभ होगा। इससे परिवार की वृद्धि रुक सकती है।

  5. सप्तम/अष्टम सूर्य हो तो ताम्बे का दान नहीं देना चाहिए, धन की हानि होने लगेगी।

  6. मंत्रोच्चारण के लिए शिक्षा-दीक्षा लेनी चाहिए क्योंकि अशुद्ध उच्चारण से लाभ की बजाय हानि अधिक होती है।

  7. जब भी मंत्र का जाप करें उसे पूर्ण संख्या में करना जरूरी है।

  8. मंत्र एक ही आसन पर, एक ही समय में सम संख्या में करना चाहिए।

  9. मंत्र जाप पूर्ण होने के बाद दशांश हवन अवश्य करना चाहिए तभी पूर्ण फल मिलता है।

  10. कुछ लोग वार के अनुसार वस्त्र पहनते हैं, यह हर किसी के लिए सही नहीं होता है। कुंडली में जो ग्रह अच्छे हैं उनके वस्त्र पहनना शुभ है लेकिन जो ग्रह शुभ नहीं हैं उनके रंग के वस्त्र पहनना गलत हो सकता है।

  11. कई बार किसी से सलाह लिए बिना कुछ लोग मोती पहन लेते हैं, यह गलत है अगर कुंडली में चन्द्रमा नीच का है तो मोती पहनने से व्यक्ति अवसाद में आ सकता है।

  12. अक्सर देखा गया है कि किसी की शादी नहीं हो रही है तो ज्योतिषी बिना कुंडली देखे पुखराज पहनने की सलाह दे देते हैं इसका उल्टा प्रभाव होता है और शादी ही नहीं होती।

  13. कुंडली में गुरु नीच का, अशुभ प्रभाव में, अशुभ भाव में हो तो पुखराज कभी भी नहीं पहनना चाहिए।

  14. कई लोग घर में मनी प्लांट लगा लेते हैं यह सुनकर कि इससे घर में धन वृद्धि होगी लेकिन तथ्य तो यह है कि अगर बुध खराब हो तो घर में मनी प्लांट लगाने से घर की बहन-बेटी दुखी रहती हैं।

  15. कैक्टस या कांटे वाले पौधे घर में लगाने से शनि प्रबल हो जाता है अतः जिनकी कुंडली में शनि खराब हो उन्हें ऐसे पौधे नहीं लगाने चाहिए।

  16. यदि शनि शुभ फल दे रहे हो तो राहु और केतु अशुभ फल नहीं दे सकते और यह भी माना जाता है कि शनि का शुभ फल देखने के लिए चंद्रमा को देखा जाता है।

  17. राहु का सम्बन्ध ससुराल से होता है अगर ससुराल से दुखी है तो राहु ख़राब चल रहा है।

  18. शनि उस व्यक्ति को कभी बुरा फल नहीं देते जो मजदूरों और समाज के निचले स्तर के लोगो का सम्मान करता है क्योंकि मजदूर शनि के कारक है । जो छोटे दर्जे के लोगो का सम्मान नहीं करता उसे शनि सदैव बुरा फल ही देते है।

  19. अगर कुंडली में मंगल कमजोर हो यानि कम अंश का हो तो ऋण लेने की स्थिति बनती है।

  20. अगर मंगल कुंडली में शनि, सूर्य या बुध आदि पापग्रहों के साथ हो तो व्यक्ति को जीवन में एक बार ऋण तो लेना ही पड़ता है।

  21. दूसरा व दशम भाव कमजोर हो, एकादश भाव में पाप ग्रह हो या दशम भाव में सिंह राशि हो, ऐसे लोग कर्म के प्रति अनिच्छुक होते हैं।

  22. यदि व्यक्ति का 12 वां भाव प्रबल हो व दूसरा तथा दशम कमजोर तो जातक उच्च स्तरीय व्यय वाला होता है और 5. निरंतर ऋण लेकर अपनी जरूरतों की पूर्ति करता है।

  23. आवास में वास्तु-दोष- पूर्वोत्तर कोण में निर्माण हो या उत्तर दिशा का निर्माण भारी व दक्षिण दिशा का निर्माण हल्का हो तो व्यक्ति के व्यय अधिक होते हैं और ऋण लेना ही पड़ता है।

 

जन्म कुंडली में कारक ग्रह दोष/बाधा/ अशुभता निवारण करने के उपाय :

 ज्योतिष कोई जादू की छड़ी नहीं है ! ज्योतिष एक विज्ञानं है ! ज्योतिष में जो ग्रह आपको नुकसान करते है, उनके प्रभाव को कम कर दिया जाता है और जो ग्रह शुभ फल देता है, उनके प्रभाव को बढ़ा दिया जाता है ! किसी भी कारण वश किसी भाव से संबंधित फल प्राप्ति में बाधा का अनुभव हो तो उस भाव के कारक ग्रह के उपाय के तौर पर जातक को ग्रह से संबंधित जड़ी/ओषधि जल में मिला कर स्नान ज़रूर करना चाहिए, जैसे कि गुरु ग्रह 2, 5, 9, 12वे भाव का कारक ग्रह है तो जब भी इन में से किसी भाव से फल प्राप्ति में बाधा का अनुभव हो तो बाकी उपायों के साथ जातक को जल में हल्दी मिला कर स्नान करना चाहिए  

प्रथम भाव के लिए बेल के पत्ते जल में मिला कर स्नान करें,

तृतीय भाव के लिए नीम के पत्ते ,

चतुर्थ भाव के लिए जल में दूध मिला कर ,

छ्ठे भाव के लिए दूर्वा जल में मिला कर,

सप्तम भाव के लिए हरी इलायची पानी में उबाल कर उस पानी को स्नान करने वाले जल में मिला दें ,

अष्टम और दसम भाव के लिए स्नान से पहले सरसो का तेल से मालिश करें ,

एकादश भाव के लिए जल में काले तिल मिला कर स्नान करें ,

घर में बार-बार धन हानि हो रही हो तों वीरवार को घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़क कर गुलाल पर शुद्ध घी का दोमुखी (दो मुख वाला) दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय मन ही मन यह कामना करनी चाहिए की भविष्य में घर में धन हानि का सामना न करना पड़े। जब दीपक शांत हो जाए तो उसे बहते हुए पानी में बहा देना चाहिए।

काले तिल परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उसार कर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बंद होगी।

घर की आर्थिक स्थिति ठीक करने के लिए घर में सोने का चौरस सिक्का रखें। कुत्ते को दूध दें। अपने कमरे में मोर का पंख रखें।

अगर आप सुख-समृद्धि चाहते हैं, तो आपको पके हुए मिट्टी के घड़े को लाल रंग से रंगकर, उसके मुख पर मोली बांधकर तथा उसमें जटायुक्त नारियल रखकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।

एक हंडिया में सवा किलो हरी साबुत मूंग की दाल, दूसरी में सवा किलो डलिया वाला नमक भर दें। यह दोनों हंडिया घर में कहीं रख दें। यह क्रिया बुधवार को करें। घर में धन आना शुरू हो जाएगा।

व्यक्ति जब उन्नति की ओर अग्रसर होता है, तो उसकी उन्नति से ईर्ष्याग्रस्त होकर कुछ उसके अपने ही उसके शत्रु बन जाते हैं और उसे सहयोग देने के स्थान पर वे ही उसकी उन्नति के मार्ग को अवरूद्ध करने लग जाते हैं, ऐसे शत्रुओं से निपटना अत्यधिक कठिन होता है। ऐसी ही परिस्थितियों से निपटने के लिए

1) अखंडित भोज पत्र पर 15 का यंत्र लाल चन्दन की स्याही से मोर के पंख की कलम से बनाएं और उसे सदा अपने पास रखें।

2) प्रात:काल सात बार हनुमान बाण का पाठ करें तथा हनुमान जी को लड्डू का भोग लगाए¡ और पाँच लौंग पूजा स्थान में देशी कर्पूर के साथ जलाएँ। फिर भस्म से तिलक करके बाहर जाए¡। यह प्रयोग आपके जीवन में समस्त शत्रुओं को परास्त करने में सक्षम होगा, वहीं इस यंत्र के माध्यम से आप अपनी मनोकामनाओं की भी पूर्ति करने में सक्षम होंगे।

॰ऋग्वेद (4/32/20-21) का प्रसिद्ध मन्त्र इस प्रकार है -`ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।।´ (हे लक्ष्मीपते ! आप दानी हैं, साधारण दानदाता ही नहीं बहुत बड़े दानी हैं। आप्तजनों से सुना है कि संसारभर से निराश होकर जो याचक आपसे प्रार्थना करता है उसकी पुकार सुनकर उसे आप आर्थिक कष्टों से मुक्त कर देते हैं – उसकी झोली भर देते हैं। हे भगवान मुझे इस अर्थ संकट से मुक्त कर दो।) निम्न मन्त्र को शुभमुहूर्त्त में सर्व ग्रह बाधा निवारण यंत्र के सम्मुख प्रारम्भ करें। प्रतिदिन नियमपूर्वक 5 माला श्रद्धा से भगवान् श्रीकृष्ण का ध्यान करके, जप करता रहे –

“ॐ क्लीं नन्दादि गोकुलत्राता दाता दारिद्र्यभंजन।सर्वमंगलदाता च सर्वकाम प्रदायक:। श्रीकृष्णाय नम:”

जिन व्यक्तियों को लाख प्रयत्न करने पर भी स्वयं का मकान न बन पा रहा हो, वे इस टोटके को अपनाएं। प्रत्येक शुक्रवार को नियम से किसी भूखे को भोजन कराएं और रविवार के दिन गाय को गुड़ खिलाएं। ऐसा नियमित करने से अपनी अचल सम्पति बनेगी या पैतृक सम्पति प्राप्त होगी। अगर सम्भव हो तो प्रात:काल स्नान-ध्यान के पश्चात् निम्न मंत्र का जाप करें।

“ॐ पद्मावती पद्म कुशी वज्रवज्रांपुशी प्रतिब भवंति भवंति।।”

यह उपाय लगातार 43 दिन करना चाहिए ।

शनि राहु और केतू — जीवन पर प्रभाव

शुक्रवार को राहु के रूप में झाडू अगर लाई जाये, तो वह घर में जो भी है उसे साफ़ करती चली जाती है।

शनिवार के दिन लोहे का सामान जो रसोई में काम आता है लाने से वह कोई न कोई बीमारी लाता ही रहता है,

 रविवार को मकान दुकान या किसी प्रकार के रक्षात्मक उपकरण जो किवाड गेट आदि के रूप में लगाये जाते है वे किसी न किसी कारण से धोखा देने वाले होते है,

सोमवार को लाया गया हथियार अपने लिये ही शामत लाने वाला होता है।

मंगलवार को राहु का कार्य घर में छावन के रूप में चाहे वह छप्पर के लिये हो या छत बनाने के लिये हो, किसी प्रकार से टेंट आदि लगाकर किये जाने वाले कार्यों से हो या छाया बनाने वाले साधनों से हो वह हमेशा दुखदायी होती है।

जन्म-पत्रिका के किसी भी भाव में शनि-राहू या शनि-केतू की युति हो तो प्रेत श्राप का निर्माण करती है। शनि-राहू या शनि-केतू की युति उस भाव के फल को पूरी तरह बिगाड़ देती है तथा लाख यत्न करने पर भी उस भाव का उत्तम फल प्राप्त नहीं होता है। हर बार आशा तथा हर बार धोखा की आँख मिचौली जीवन भर चलती रहती है। वह चाहे धन का भाव हो, सन्तान सुख, जीवन साथी या कोई अन्य भाव। भाग्य हर कदम पर रोड़े लेकर खड़ा सा दिखता है जिसको पार करना बार-बार की हार के बाद जातक के लिए अत्यन्त कठिन होता है।

एक कथा के अनुसार जब हनुमान जी ने राहु और केतु को हाथो में पकड़ लिया था और शनि को पूँछ में तब शनि महाराज ने कहा था आज जो हमें इस बालक से छुड़ा देगा उसे हम जीवन में कभी परेशान नहीं करेगेयदि किसी की कुंडली में यह तीनो ग्रह परेशान कर रहे हो तो एक शाबर मंत्र साबर विधि से इन्हें हनुमान जी से छूडवा दिया जाता है ! फिर यह जीवन भर परेशान नहीं करते

धर्म में आस्था रखने वाला व्यक्ति इन सुखों को पाने या कमी होने के लिए देवकृपा की हमेशा आस रखता है। हर गृहस्थ या अविवाहित जीवन में बुद्धि, ज्ञान, संतान, भवन, वाहन इन पांच सुखों की कामना जरूर करता है। समयाभाव होने पर यह उपाय न केवल आपकी मुसीबतों को कम करते हैं, बल्कि जीवन को सुखी और शांति से भर देते हैं।

ऊपर दिए गए उपाय और ग्रह योग सर्वसाधारण स्वरूप के हैं, अपनी जन्म कुंडली के आधार पर राशी अनुसार ग्रह दोष निवारण, उधार और कर्ज से परेशान हैं तो मुक्ति के लिए उपाय जानने हेतु इच्छुक हैं तो अभी संपर्क करे ।

इंडिया एस्ट्रोलॉजी फाउंडेशन

ज्योर्तिविद श्यामा गुरुदेव

CALL OR WHATSPP AT 76203149722

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