इन कारणों से पूजा पाठ फल नहीं देते- जानिए कारण व रहिए सावधान

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धर्म में विश्वास और आस्था रख पूजा पाठ करने वाले बहुत सारे लोगों की शिकायत रहती है कि वे लंबे समय से पूरी श्रद्धा और गंभीरता से पूजा उपासना करने के बाद, दान इत्यादि धार्मिक अनुष्ठान करने के बाद भी उनकी साधना को शायद ईश्वर स्वीकार ही नहीं कर रहे, जिससे सफलता के उचित परिणाम नहीं मिल रहे । इतनी पूजा पाठ के बाद भी बहुत सारी समस्याएं हे कि पीछा ही नहीं छोड़ती । इस प्रकार की शिकायत करने वाले कोई एक या दो नहीं बहुत सारे लोग मिल जाएंगे ।

आइये यह जानने का प्रयास करते है कि ऐसा क्यों होता है।

सनातन धर्म मानने वाले ज्यादातर घरों में पूजापाठ किया जाता है। हिंदू पंचांग में पूजापाठ और व्रत अनुष्‍ठान से जुड़ी साल भर में इतनी तिथियां होती हैं कि पूजापाठ और अनुष्‍ठान होते ही रहते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि कई बार जाने-अनजाने पूजा करते समय छोटी-छोटी गलतियों का ध्यान नहीं रहता है, जिसके कारण पुण्य फल की प्राप्ति नहीं होती है। शास्त्रों और पुराणों में पूजा करने के दौरान कुछ नियमों के पालन करने के बारे में बताए गया है, जिनको पूजा करते समय जरूर ध्यान में रखना चाहिए। आइए जानते हैं कि पूजा करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

वैसे इसके कारण बहुत से हो सकते है परंतु जो बहुत ही सामान्य कारण है जैसे कि…

अनुपयुक्त रत्न पहनना

यदि किसी व्यक्ति ने अनुपयुक्त रत्न पहना होगा या फिर किसी अनुभवहीन के कहने पर कोई रत्न धारण कर लिया होगा और वह रत्न अनुकूल न होने पर सर्वप्रथम आपका मन बेचैन कर देगा। नींद उड़ जाएगी, नींद यदि आएगी तो बुरे और गलत सपने दिखाई देने लगेंगे। ये तो अनुपयुक्त रत्न धारण करने पर तुरंत प्रभाव होंगे परंतु अनुपयुक्त रत्न आपके पूजा पाठ को व्यर्थ बनाना शुरू कर देगा। आपकी पूजा इस प्रकार हो जाएगी जैसेकि छेद युक्त घड़े में पानी डाला जाए।

इस समस्या अर्थात पूजा पाठ का असर न होने पर सर्वप्रथम यह देखे कि अभी हाल ही में आपने कोई रत्न तो धारण नहीं कर लिया है।

पूजा पाठ का आसन और अन्य विकार

हमारे शास्त्रों में पूजा पाठ इत्यादि के लिए आसन का प्रावधान बताया गया है और आसन के बारें में विस्तार से चर्चा की गयी है। इसलिए आप यह सुनिश्चित कर लें कि पूजा पाठ के समय आप उचित आसन का प्रयोग ही करें।

पूजा के समय आप यदि मंत्र पढ़ते है, लंबे पाठ आरती इत्यादि करते है परंतु आसन का प्रयोग नहीं करते तो तो आपकी पूजा का पृथ्वीकरण हो जाएगा। पूजा के फलस्वरूप पैदा हुई ऊर्जा आसन के अभाव में पृथ्वी में समा जाएगी। अंतत: आप अपनी साधना के फल से वंचित हो जाएंगे।

पूजा अर्चना को गुप्त स्थान में करने का विधान बताया गया है क्योंकि यदि पूजा के समय यदि कोई छू देता है तो भी पूजा के फलस्वरूप पैदा हुई ऊर्जा का पृथ्वीकरण हो जायेगा| सामान्य भाषा में हम कहते कि अर्थिन्ग (earthing) हो रहीं है।

पूजा के बाद यदि कोई क्रोध करता है, सो जाता है, निंदा करता है तो भी पूजा का फल पूजा करने वाले को प्राप्त नहीं होता। इसलिए इन बातों से बचने का प्रयास करें।

कभी भी पूजा चारपाई पर बैठ कर न करें | नंगे फर्श पर न बैठें | यदि आसन मिलना सम्भव न हो तो उनी कम्बल प्रयोग कर सकते हैं| अभिप्राय है कि पृथ्वी के सीधे संपर्क में आने से बचें।

भूत प्रेत या अतृप्त आत्मा का होना

सामान्यत: यदि किसी परिवार में किसी अविवाहित सदस्य की अकाल मृत्यु हो जाती है तो उसे अतृप्त आत्मा माना जाता है और अतृप्त आत्मा अपनी मुक्ति के लिए बाधाएं पैदा करती है। पूजा पाठ का लाभ न प्राप्त होने पर इस बिन्दु पर भी ध्यान दें कि आपके परिवार में कहीं इस प्रकार की कोई घटना घटित तो नहीं हुई है यदि ऐसा हुआ है तो उस अतृप्त आत्मा की मुक्ति के लिए शास्त्रों में बताए गए नियमों में निहित विधियों का पालन करें।

घर का किसी अन्य बाधा या वास्तुदोष से ग्रस्त होना

आप किसी नए मकान में रहने के लिए आएं है तो सुनिश्चित कर ले कि आपने अपना घर किसी नि:संतान व्यक्ति से तो नहीं खरीदा है। बहुत बार देखा गया है कि पितृ दोष के फलस्वरूप व्यक्ति नि:संतान रहता है और उससे प्राप्त हुई वस्तु भी दोष ग्रस्त हो सकती है।

यह भी सुनिश्चित कर लें कि आपका घर कब्रिस्तान पर तो नहीं बना है। कब्रिस्तान पर बने घर रहने के लिए उपयुक्त नहीं होते।

घर में पूजा स्थल घर की दक्षिण पश्चिम या पश्चिम दिशा में होने पर भी पूजा पाठ का लाभ प्राप्त नहीं होता।

पूजा पाठ सदा घर के किसी स्थान में करना चाहिए जहां पर आसानी से सबकी दृष्टि नहीं पड़ती। यदि घर में प्रवेश होते ही पूजा स्थल पर सबकी दृष्टि पड़ती है, अर्थात पूजा स्थल छिपा नहीं है तो भी पूजा पाठ का लाभ नहीं मिलता। सीढी के नीचे भी पूजा गृह अच्छा नहीं माना जाता।

मंत्रों का उच्चारण गलत होने पर भी पुजा व्यर्थ होती है

मंत्र हमारे ऋषि मुनियों द्वारा अविष्कृत बहुत ही वैज्ञानिक ध्वनियाँ है। मंत्र जाप से कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है। यदि आप नियमित पूजा में मंत्र जाप करते है तो ध्यान रखें कि आपका मंत्र उच्चारण शुद्ध हो अन्यथा पूजा निरर्थक ही होगी। एक अक्षर की गलती आपको मन्त्र से होने वाले लाभ से वंचित रख सकती है | कभी कभी मन्त्र का उच्चारण गलत होने से नुक्सान होता भी देखा गया है | एक एक अक्षर से मन्त्र बनता है यदि कहीं त्रुटी हो तो मन्त्र देने वाले से सही उच्चारण सीख कर ही मंत्र जाप करें।

प्रणाम

श्रीमद्भागवत गीता में बताया गया है कि पूजा करते समय कभी भी एक हाथ से प्रणाम नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के सभी पुण्य नष्ट हो जाते हैं। प्रणाम हमेशा दोनो हाथ जोड़कर किया दाता है। वहीं अपनी पिता और बड़े भाई को लेटकर प्रणाम करना चाहिए और माता के सामने झुककर प्रणाम करना चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार, जप करते समय हमेशा दाहिने हाथ को कपड़े से या फिर गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर पूजना चाहिए। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि कभी भी कोई वस्तु या फिर दान बांया हाथ से ना दें। इनके लिए हमेशा दाहिने हाथ का प्रयोग करें।

चरण स्पर्श

पुराणों में चरण स्पर्श करने का भी विधान बताया गया है। कभी भी ऐसे व्यक्ति के चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए, जो सो रहा हो। सनातन धर्म के अनुसार, लेटे हुए व्यक्ति के चरण स्पर्श तभी किए जाते हैं जब उसकी मृत्यु हो चुकी हो। सोते हुए व्यक्ति के पैर छूना पाप करने जैसा समान माना गया है।

जप

जप करते समय हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि होंठ या फिर जीभ ना हिले। इस तरह से जप करने की प्रकिया को उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता है। साथ ही देवी-देवताओं की विशेष कृपा बनी रहती है।

दीपक

हमेशा ध्यान रखें कि दीपक को कभी भी दीपक से नहीं जलाना चाहिए। दीपक को हमेशा माचिस या फिर किसी अन्य चीज से जलाना चाहिए। साथ ही घी के दीपक को अपनी लेफ्ट साइड तथा देवताओं की राइट साइड की ओर ही रखें और हमेशा चावल पर रखकर ही प्रज्वलित करें।

अर्पण 

भगवान शंकर को बेलपत्र, विष्णुजी को तुलसी, गणेशजी को दूर्वा और लक्ष्मीजी को कमल का फूल प्रिय हैं। शंकरजी केवल महाशिवरात्रि के दिन ही कुमकुम चढ़ाएं और किसी दिन नहीं। हमेशा ध्यान रखें कि शिवजी को कुंद, विष्णुजी को धतूरा, दुर्गादेवी को आक तथ मदार और सूर्य भगवान को तगर के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए।

पूजा करते समय हमेशा ध्यान रखें कि आपका पूर्व की तरफ मुख करके बैठे हों और अपने लेफ्ट साइड ही घंटा, घूप और राइड साइड शंख, जलपात्र और पूजन सामग्री रखें। इस तरह पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि जो व्यक्ति पूजा कर रहा हो, उसके माथे पर तिलक होना चाहिए।

मांस-मदिरा का सेवन

आप शास्त्र अनुसार नियमित पूजा पाठ करते हैं तो आपके खानपान में भी शुद्धता रहनी चाहिए। पूजा पाठ आप करते है परंतु आपके द्वारा या आपके परिवार के किसी अन्य सदस्य द्वारा मांस-मदिरा का सेवन किया जाता है तो पूजा का पूरा फल पाने की उम्मीद न करें

पूजा-पाठ करने से मन को शांति मिलती है. सभी लोग अपने धर्म और आस्था के अनुसार पूजा-पाठ करते हैं. हिंदू धर्म में पूजा का बेहद खास महत्व है. लेकिन पूजा करते समय कई सावधानियों का ख्याल रखना जरूरी होता है. आइए जानते हैं हिंदू धर्म में पूजा पाठ करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

 

घर में पूजा पाठ का सही स्थान क्या हो

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– घर में हमेशा पूरब या उत्तर दिशा में मंदिर होना चाहिए.

– घर का मंदिर हमेशा लकड़ी का हो.

– घर के मंदिर के आसपास कोई गंदगी नहीं होना चाहिए.

 

घर के मंदिर का मुख्य रंग क्या हो

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– मंदिर का सही रंग हल्का पीला या नारंगी होता है.

– घर के मंदिर में हमेशा हल्की पीली लाइट का प्रयोग करना चाहिए.

– मंदिर में गहरे नीले रंग का प्रयोग ना करें.

 

घर के मंदिर में क्याक्या रखना चाहिए

– घर के मंदिर में हलके पीले रंग का या लाल रंग का वस्त्र बिछाएं.

– मंदिर में एक ही भगवान की दो तस्‍वीरें ना रखें. खासतौर से घर के मंदिर में कभी भी गणेश जी की 3 प्रतिमाएं नहीं होना चाहिए. कहा जाता है कि ऐसा होने से शुभ कार्य में अड़चन आने लगती है.

– भगवान गणपति और महालक्ष्मी  का स्वरूप रखें.

–  अपने इष्ट और अपने कुल गुरु का चित्र अवश्य रखें.

– एक तांबे के लोटे में गंगाजल भरकर रखें.

-घर के मंदिर में पूजा करने के लिए दो शंख ना रखें. इनमे से एक शंख हटा दें.

– घर के मंदिर में ज्यादा बड़ी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए. बताया जाता है कि यदि हम मंदिर में शिवलिंग रखना चाहते हैं तो शिवलिंग हमारे अंगूठे के आकार से बड़ा नहीं होना चाहिए. शिवलिंग बहुत संवेदनशील होता है और इसी वजह से घर के मंदिर में छोटा-सा शिवलिंग रखने की सलाह दी जाती है.

-भगवान की मूर्तियों को एक-दूसरे से कम से कम 1 इंच की दूरी पर रखें. एक ही घर में कई मंदिर भी न बनाएं वरना मानसिक, शारीरिक और आर्थिक समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है.

घर के मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा की संख्या एक ही होनी चाहिए, क्योंकि बजरंग बली रुद्र (शिव) के अवतार हैं। घर में शिवलिंग भी एक ही होना चाहिए। 

आपने कई बार नटराज की प्रतिमा देखी होगी, यह देखने में बहुत आकर्षक लगती है किन्तु इन्हें घर में रखने की भूल ना करें। नटराज भगवान शिव का रौद्र रूप है यानि क्रोधित अवस्था और ऐसी प्रतिमा घर में रखने से अशांति फैलती है।

घर का मंदिर बनाते समय क्याक्या सावधानी बरतें

वास्तु के अनुसार घर में पूजा स्थान हमेशा ईशान कोण यानी कि उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए.

इस दिशा में पूजा घर होने से घर में तथा उसमें रहने वाले लोगों पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार हमेशा बना रहता है. वस्तुतः देवी देवताओं की कृपा के लिए घर में पूजा स्थान वास्तु दोष से पूर्णतः मुक्त होना चाहिए अर्थात वास्तुशास्त्र के अनुसार ही घर में पूजा स्थान होना चाहिए.

पूजा स्थान यदि वास्तु विपरीत हो तो पूजा करते समय मन भी एकाग्र नहीं हो पाता और पूजा से पूर्णतः लाभ नहीं मिल पाता है.

– घर का मंदिर दक्षिण पश्चिम दिशा में नहीं होना चाहिए.

– वास्‍तु के हिसाब से पूजा घर हमेशा पूर्व या उत्‍तर दिशा में ही होना चाहिए. मंदिर का पश्चिम या दक्षिण दिशा में होना अशुभ फलों का कारण बन सकता है.

– मंदिर के आसपास कोई गंदगी ना हो.

– मन्दिर शौचालय के पास बिल्कुल ना बनाएं.

– मंदिर के आसपास जूते चप्पल ना रखें

-शास्त्रों के अनुसार खंडित मूर्तियों की पूजा वर्जित है. जो भी मूर्ति खंडित हो जाती है, उसे पूजा के स्थल से हटा देना चाहिए और किसी पवित्र बहती नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए. खंडित मूर्तियों की पूजा अशुभ मानी गई है.

– लेकिन शालिग्राम जी की एक मात्र ऐसी प्रतिमा है जिसका खंडित होने से दोष नहीं लगता।

कौन सी दिशा में बैठकर भजन कीर्तन जाप किया जाए

– हमेशा भजन कीर्तन पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके किया जाए तो सर्वोत्तम रहता है. अन्य किसी दिशा में किया गया भजन कीर्तन मन में उत्साह नहीं ला पाता है.

– भजन कीर्तन करने से पहले भगवान मंगल मूर्ति के चित्र को हमेशा स्थापित करें और उसके बाद ही भजन कीर्तन शुरू करें.

-जिस देवी देवता का भजन किया जा रहा है उसके चित्र के सामने गाय के घी का दीपक और धूप अवश्य जलाएं और जल का पात्र भी रखें.

भजन कीर्तन में किनकिन सावधानियों को बरतें

– भजन कीर्तन करते समय इधर-उधर की बातों में ध्यान ना दें.

– हमेशा शुद्ध और साफ वस्त्र पहनकर ही भजन कीर्तन करें.

–  भजन कीर्तन में शुद्ध मिठाई और साफ-सुथरे फलों का प्रयोग करें.

– हमेशा भजन कीर्तन में गाय के घी का दीपक और कलावे की बातें का प्रयोग करें.

घर में पूजा पाठ और जाप का पूरा फल पाने के लिए करें उपाय

– घर में पूजा पाठ करते समय श्वेत गुलाबी या हल्के पीले वस्त्र पहनकर ही पूजा करें.

– हमेशा लाल या पीले आसन पर बैठकर ही मंत्र जाप करें.

– जाप हमेशा लाल चंदन की माला या रुद्राक्ष की माला से करें.

– जाप शुरू करने से पहले भगवान गणपति व गुरु और अपने इष्ट का ध्यान करना चाहिए. उसके बाद ही जाप शुरू करें.

हर परेशानियों को दूर करने के उपाय

– घर में अकारण कलह रहता हो तो प्रतिदिन सुबह गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें।

– घर में यदि कोई बीमार रहता हो तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं।

– घर में धन की कमी हो तो श्री नारायण भगवान को पीले पुष्प चढ़ाएं।

– घर में आपस में पति पत्नी में विवाद हो तो संयुक्त रूप से शिव पार्वती का पूजन करें।

क्या नहीं करें

– संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सूर्यास्त के समय तुलसी तोड़ने से दोष लगता है।

दीपक से दीपक नहीं जलाना चाहिए।

भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए।

 कुष्मांड को स्त्रियां नहीं तोड़े या चाकू आदि से नहीं काटें। यह उत्तम नही माना गया हैं।

नाशपाती ऐसा फल है जिसे पूजा पाठ में इस्तेमाल करने से हम मुसीबत में फंस सकते है क्योंकि इस फल का पूजा पाठ में प्रयोग निषेध इस फल के नाम के कारण किया गया है. इस फल के नाम के कारण इसे अशुभ माना जाता है क्योकि इस फल का नाम ही नाशपाती है और इस फल को कभी भी पूजा पाठ में इस्तेमान नहीं करना चाहिए वरना नुकसान हो सकता है।

नहाते समय भगवान के मंत्र या स्तुति नहीं बोलनी चाहिए।

पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता है।

– दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होते हैं।

– सोने और चांदी के बर्तन में रखा पानी अशुद्ध नहीं होता

इस विषय पर मैंने बहुत ही संक्षिप्त रूप से विवेचना की है। पूजा पाठ का फल प्राप्त न होने पर इन कारणो पर ध्यान दें,

This Post Has One Comment

  1. Dr Yogesh Patil

    गुरुजी बहुत ही सुंदर विश्लेषण किया है आपने. धन्यवाद

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