आपके घर की ये दिशाएं दूषित है तो सावधान हो जाए

जानिए आपके घर पर किस दिशा में पड़ता है कौन से ग्रह का प्रभाव

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जानिए आपके घर पर किस दिशा में पड़ता है कौन से ग्रह का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र और वास्तु का संबंध बहुत प्राचीन है। हमेशा से ही ग्रह और वास्तु का प्रभाव एक-दूसरे पर पड़ता है। इन ग्रहों की शक्ति का प्रभाव ना सिर्फ आपके जीवन पर पड़ता है बल्कि आपके आसपास की चीजों पर भी पड़ता है। वास्तु के अनुसार, आठ दिशाएं होती हैं और हर दिशा पर एक निश्चित ग्रह का प्रभाव होता है। जैसे पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य को माना जाता है, वैसे ही पश्चिम दिशा के स्वामी शनि ग्रह को। आइए जानते हैं ग्रह और वास्तु का संबंध क्या है…

सूर्य

अगर आपके घर का मेन गेट पूर्व दिशा की तरफ है तो आपके घर पर सूर्य का आधिपत्य है। सूर्य का प्रभाव आप पर और आपके परिवार के सदस्यों पर पड़ता है। ऐसे घर के मालिक को कड़वी चीजें, जैसे- करेला, मैथी आदि अच्छी लगती हैं और मेष राशि वालों के लिए यह शुभ रहता है।


चंद्रमा

अगर आपके घर का मेन गेट उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर है तो आपके घर पर चंद्रमा का आधिपत्य है। ऐसे घर के मालिक का स्वभाव चंचल और भावुक होता है। उनको हरी सब्जियां अच्छी लगती हैं और खाने में नमक ज्यादा पसंद होता है। वृश्चिक और धनु राशि वालों के लिए यह दिशा शुभ होती है।

मंगल

अगर आपके घर का मेन गेट दक्षिण दिशा की ओर है तो आपके घर पर मंगल का आधिपत्य है। ऐसे घर का मालिक साहसी, निडर और चंचल होता है और खाना मसालेदार अच्छा लगता है। ऐसे घर में रहने वाले सदस्यों का स्वास्थ्य ज्यादा अच्छा नहीं रहता है। इस दिशा में किचन और भंडार गृह बनाया जा सकता है।

 बुध

अगर आपके घर का मेन गेट उत्तर दिशा की ओर है तो आपके घर पर बुध का स्वामित्व रहता है। बुध ग्रह को बुद्धि और विनोद प्रदान करने वाला ग्रह माना गया है इसलिए जो इस घर में रहते हैं वे श्रेष्ठ बुद्धि वाले होते हैं। उनकी रूची हमेशा अध्ययन और शिक्षा के क्षेत्र में होती है। इस दिशा में दोष होने पर और कुंडली में गुरु ग्रह के पीड़ित होने पर व्यक्ति कभी भी पूजा-पाठ सही से नहीं करता और बच्चों के विवाह में देरी होती है। ऐसे घर में रहने वाले लोगों को बीपी और उदर विकार से सावधान रहने की जरूरत है।

शुक्र

अगर आपके घर का मेन गेट आग्नेय कोण की ओर है तो आपके घर पर शुक्र का स्वामित्व रहता है। शुक्र का संबंध विवाह, प्रेम, ऐशवर्य और व्यक्तित्व से माना जाता है। अगर इस दिशा में दोष है तो पत्नी सुख में बाधा, विवाह जीवन में कड़वाहट, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की आशंका बनी रहती है। इस घर में रहने वाले लोग ऐशवर्य से रहते हैं। आग्नेय कोण में कभी भी भूमिगत टैंक का निर्माण नहीं करवाना चाहिए। साथ ही स्फटिक के श्रीयंत्र की पूजा करें।


शनि

अगर आपके घर का मेन गेट पश्चिम दिशा की ओर है तो आपके घर पर शनि का स्वामित्व रहता है। इस दिशा में अध्ययन कक्ष और शयन कक्ष शुभ माना जाता है। इस घर के मालिक का स्वभाव सहनशील, गंभीर होता है। ऐसे लोग कुछ भी कार्य करने से पहले सोच-विचार करते हैं। इस दिशा में दोष होने पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती है। मांस-मदिरा के सेवन से बचें और भैरों की उपासना करें।

 

 राहु और केतु

अगर आपके घर का मेन गेट नैऋत्य दिशा की ओर है तो आपके घर पर राहु और केतु का स्वामित्व रहता है। इस घर के मालिक का स्वभाव गुस्सैल, तामसी, घमंडी और धूर्त होता है। ज्योतिष के अनुसार, राहु को दादा और केतु को नाना का प्रतिक माना गया है। वास्तु की दृष्टि से इसे आसुरी दिशा माना जाता है।

कुंडली में स्थित कोई भी ग्रह युति एवं पीड़ा में स्थित ग्रह आपके जीवन के सभी पक्षों में अपना प्रभाव अवश्य रखते है.
वो चाहे आपके घर का वास्तु हो अथवा आपके रोग अथवा आपके जीवन का कोई भी पक्ष , शत्रु युति में शामिल दोनों ग्रहो की दिशा में वास्तु दोष होगा किन्तु ये वास्तु दोष आपको तब तक तंग नहीं करेगा जब तक आपकी शुभ ग्रहो की दशा चल रही हो।

कई बार हमने देखा है किसी घर में रहते हुवे लोगों ने बहुत ज्यादा तरक्की की है , किन्तु कई वर्ष पश्चात् उन्हें वास्तु शास्त्री के चक्कर लगाते हुवे देखा है।

घर तो एक ही है फिर आखिर क्या हुवा , अर्थात वास्तु दोष युक्त घर में भी यदि आप है वो आपको हानि तब तक नहीं पहुंचाएगा जब तक आपकी शुभ दशा चल रही हो ,जब अशुभ दशा का प्रारम्भ होता है तो स्वत ही कुछ ऐसे बदलाव आ जाते है जो जाने अनजाने होकर परेशानी उत्पन करते है , बहरहाल आपकी जन्मकुंडली जीवन का मुख्या आधार है उसमे स्थित ग्रहो के अनुसार ही आपको घर प्राप्त होता है एवं उसमे व्याप्त वास्तु दोष अथवा शुभता मिलती है।

घर होना सौभाग्य की बात है और यदि आपका घर है तो उसके मुखिया के सभी ग्रहो का प्रभाव भी है। आपकी मुख्या दशा अनुसार उक्त दिशाओं को देखे एवं यदि कोई दोष है तो उक्त ग्रह के लिए उपाय एवं वास्तु किसी योग्य व्यक्ति से अवश्य मिलकर सही करवाए।

वास्तु शास्त्र एवं ज्योतिष के नियमों के आधार पर दिशाओं एवं ज्योतिषीय ग्रहों में समन्वय स्थापित करके हम धन, संपदा, सुख, शांति, ऐश्वर्य संपदा। सभी कुछ प्राप्त कर सकते हैं।

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(आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिषीय चिंतक)

ज्योतिर्विद श्यामा गुरुदेव

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